घर में होता था कलेश, परिजनों ने बलि देने पर सब ठीक होने की दी सलाह, अंधविश्वास में बच्चे की कर दी हत्या: फर्रुखाबाद में 24 साल बाद आया फैसला, जीवन भर जेल में रहेगा आरोपी
फर्रुखाबाद, अमृत विचार। अंधविश्वास के चक्कर में मासूम की बलि चढ़ा देने वाले दोष सिद्ध अभियुक्त को घटना के 24 वर्ष बाद उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही 2 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। घटना शमशाबाद क्षेत्र के गांव खुर्दा में हुई थी।
जहां गांव के ही रामपाल सिंह के पुत्र प्रदीप कुमार उर्फ लल्लू उम्र 8 वर्ष की सतीश चंद्र पुत्र मदनलाल व उसके परिवारियों ने उस समय हत्या कर दी, जब लालू उनके घर खेलने गया था। रामपाल ने रिपोर्ट में कहा था कि वह जब घर लौट के आया तो मालूम पड़ा कि लालू बहुत देर से घर नहीं लौटा है, पड़ोस में ढूंढा तो पता चला कि लालू सतीश के यहां दोपहर में खेलने गया था।
लेकिन तब से वहां से लौट के नहीं आया पूछने पर उन्होंने बताया था कि थोड़ी देर पहले आया था लेकिन वापस चला गया। शक होने पर पड़ोसियों के साथ जब सतीश के घर की तलाशी ली गई तो बोरे में लिपटी लल्लू की लाश मिली थी।
घटना की सूचना पुलिस को दी गई थी और मुकदमा दर्ज हुआ था। अक्सर सतीश की भाभी और सतीश की लड़ाई होती रहती थी और घर वाले कहते थे किसी बच्चे की बलि दे दी जाए तो यह लड़ाई शांत हो सकेगी। इसके चलते इन लोगों ने बच्चे की हत्या कर दी।
मुकदमे पर सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट डॉ. अनिल कुमार सिंह ने हत्या के आरोप में सतीश को दोष सिद्ध करार देते हुए न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया गया था। सोमवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने दोषसिद्ध सतीश चंद्र को आजीवन कारावास के की सजा सुनाई।
