चलने में लाचार लोगों में स्टेम सेल फूंक रहा जान; Kanpur के GSVM मेडिकल कॉलेज में ऐसे केस आ रहे...

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर, अमृत विचार। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में शुरू हुई स्टेम सेल थेरेपी चलने-फिरने में असमर्थ लोगों के शरीर में जान फूंक रही है। किसी प्रकार हादसे का शिकार होने के बाद बेड पर जीवन व्यतीत करने वालों के लिए स्टेम सेल एक नई उम्मीद बन रहा है। स्टेम सेल से ऐसे लोगों के शरीर में परिवर्तन आ रहा है, जो सही से अपने आप हिल-ढुल तक नहीं पाते थे। इन लोगों में बुजुर्ग के साथ ही युवावस्था के लोग भी शामिल है। 

कानपुर देहात के भोगनीपुर पुखरायां निवासी कृष्णा दत्त (62) को नाभि के नीचे कोई संवेदना नहीं होती थी और तीन साल से वह चलने में भी असमर्थ थे। उनका जीवन बेड तक ही सीमित हो गया था। परिजन उनको लेकर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग पहुंचे, यहां पर विशेषज्ञों ने मरीज की जांच की और स्टेम सेल के बारे में भी जानकारी दी। 

इसी तरह मवैया निवासी शिवम सेंगर को दोनों हाथों में पकड़ खोने, पैरों में संवेदना न होने और छह साल तक चलने में असमर्थता की समस्या थी। यहां पर जांच के बाद ट्रॉमेटिक स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के निदान के लिए थेरेपी दी गई। वहीं, कानपुर देहात के शिवली निवासी धमेंद्र सिंह चौहान (39) को दो साल से शरीर के निचले हिस्सों में दर्द और चलने-फिरने में समस्या की शिकायत थी। 

डॉ. बीएस राजपूत, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला, डॉ. यामिनी राणा व डॉ. आंचल ने टीम के साथ तीनों मरीजों को ट्रॉमेटिक स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के निदान के लिए स्टेम सेल थेरेपी दी। 18 फरवरी को स्टेम सेल के विशेषज्ञ डॉ. बीएस राजपूत ने एलए के तहत ऑटोलॉगस बोन मैरो व्युत्पन्न मोनोन्यूक्लियर स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया। स्टेम सेल थेरेपी लेने वाले मरीजों के मुताबिक स्टेम सेल से पहले वह चलने को तरसते थे, लेकिन स्टेम सेल थेरेपी के बाद वह उनको काफी राहत है।

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