बरेली: घर-घर जागे देव, शुभ कार्य हुए शुरू

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बरेली,अमृत विचार। देवउठनी एकादशी पर बुधवार को घर- घर देव जगाए गए और खुशियों का माहौल रहा। महिलाओं ने घर का आंगन साफ सुथरा किया। गन्ना, सिंघाड़े, फल, पकवान, मौसम की नई सब्जियां डलिया में रख दी गयीं। उसके बाद दीप जलाकर पूजा की गई। महिलाओं ने घर के आंगन, दरवाजे पर गेरू से चित्र …

बरेली,अमृत विचार। देवउठनी एकादशी पर बुधवार को घर- घर देव जगाए गए और खुशियों का माहौल रहा। महिलाओं ने घर का आंगन साफ सुथरा किया। गन्ना, सिंघाड़े, फल, पकवान, मौसम की नई सब्जियां डलिया में रख दी गयीं। उसके बाद दीप जलाकर पूजा की गई।

महिलाओं ने घर के आंगन, दरवाजे पर गेरू से चित्र बनाए। गांव में आंगनों को लीप-पोत कर पहले ही तैयार कर लिया गया और तुलसी का पौधा रखा गया। उसके बाद तुलसी और सालिगराम का विवाह कराया गया। मान्यता यह है कि जिन परिवारों में लड़कियां नहीं हैं वे तुलसी सालिगराम का विवाह कर पुण्य कमाते हैं।

देवउठनी एकादशी पर पूजन के लिए पहले ही तैयारियां थीं। रात्रि में जब गन्ना जमीन पर पटक कर परिवार के लोग बोले- उठौ देव, जागौ देव, अंगुरिया चटकाऔ देव, क्वारेन को ब्याहु कराऔ और ब्याहेन को गौनौ करा औ देव। इसके बाद भगवान विष्णु और अन्य देवी देवताओं का पूजन किया गया।

घरों में सजे गन्ने के मंडप
बुधवार को देवउठनी एकादशी मनायी गयी। इस पर्व पर प्रत्येक घरों में गन्नों के मंडप सजाए गए। इनकी पूजा उपासना कर भगवान विष्णु को जगाया गया।

15 से 20 रुपये में बिका गन्ना
देवउठनी एकादशी पर गन्ना भगवान विष्णु की पूजा में चढ़ाने का विधान है। इसी विधान के तहत बाजार में जमकर गन्ने की बिक्री हुई। 15 से 20 रुपये में एक गन्ना बिका। आम दिनों में 20 रुपये किलो बिकने वाली शकरकंद 40 रुपये किलो बिकी। सिंघाड़ा भी 20 से 25 रुपये किलो बिका।

धूमधाम से हुआ शालिग्राम तुलसी विवाह
तुलसी जी को विष्णु प्रिया भी कहा जाता है, इसलिए देव जब उठते हैं तो हरिवल्लभा तुलसी की प्रार्थना ही सुनते हैं। देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी का विवाह शालिग्राम से कराए जाने की परंपराए है। देवउठनी एकादशी के उपलक्ष्य मे शहर मे विभिन्न स्थानों पर भगवान शालिग्राम व माता तुलसी का विवाह समारोह हुआ। परंपरा का निर्वहन करते हुए धार्मिक लोगो ने इस दौरान दरवाजे पर आई बारात का स्वागत किया फिर तोरण पूजन कर बारातियों का भी स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं के द्वारा तुलसी माता का कन्यादान कर उन्हें विदा किया गया।

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