कांग्रेस ने किसानों के समर्थन में चलाया सोशल मीडिया अभियान
नई दिल्ली। कांग्रेस ने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों का समर्थन करते हुए सोमवार को सोशल मीडिया अभियान चलाया और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने लोगों से ‘स्पीकअप फॉर फारमर्स’ नामक सोशल …
नई दिल्ली। कांग्रेस ने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों का समर्थन करते हुए सोमवार को सोशल मीडिया अभियान चलाया और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा।
राहुल गांधी ने लोगों से ‘स्पीकअप फॉर फारमर्स’ नामक सोशल मीडिया अभियान से लोगों से जुड़ने की अपील की। उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए ट्वीट किया, ‘‘मोदी सरकार ने किसान पर अत्याचार किए- पहले काले क़ानून फिर चलाए डंडे, लेकिन वो भूल गए कि जब किसान आवाज़ उठाता है तो उसकी आवाज़ पूरे देश में गूंजती है। किसान भाई-बहनों के साथ हो रहे शोषण के ख़िलाफ़ आप भी ‘स्पीकअप फॉर फारमर्स’ के माध्यम से जुड़िए।’’
मोदी सरकार ने किसान पर अत्याचार किए- पहले काले क़ानून फिर चलाए डंडे लेकिन वो भूल गए कि जब किसान आवाज़ उठाता है तो उसकी आवाज़ पूरे देश में गूंजती है।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) November 30, 2020
किसान भाई-बहनों के साथ हो रहे शोषण के ख़िलाफ़ आप भी #SpeakUpForFarmers campaign के माध्यम से जुड़िए। pic.twitter.com/tJ8bry6QWi
प्रियंका ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘नाम किसान कानून लेकिन सारा फायदा अरबपति मित्रों का। किसान कानून बिना किसानों से बात किए कैसे बन सकते हैं? उनमें किसानों के हितों की अनदेखी कैसे की जा सकती है? सरकार को किसानों की बात सुननी होगी। आइए मिलकर किसानों के समर्थन में आवाज उठाएं।’’
नाम किसान कानून
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) November 30, 2020
लेकिन सारा फायदा अरबपति मित्रों का
किसान कानून बिना किसानों से बात किए कैसे बन सकते हैं? उनमें किसानों के हितों की अनदेखी कैसे की जा सकती है?
सरकार को किसानों की बात सुननी होगी। आइए मिलकर किसानों के समर्थन में आवाज उठाएं।#SpeakUpForFarmers pic.twitter.com/av8i7jhUpt
पिछले कई दिनों से बड़ी संख्या में किसान दिल्ली के निकट विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की है।
