बरेली: नौकरी की आस बरकरार, अब राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से शिकायत
अमृत विचार, बरेली। ग्राम सेंथा, पोस्ट मोहम्मदपुर पथरा (आंवला) के किसानों की अब भी इफको प्रोजेक्ट में नौकरी मिलने की ‘आस’ बरकरार है। प्रदेश सरकार से उन्हें कोई आस नहीं दिखी तो किसानों ने अपनी बात राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के समक्ष उठायी है। किसानों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को स्पीड पोस्ट से शिकायती पत्र भेजकर इंसाफ …
अमृत विचार, बरेली। ग्राम सेंथा, पोस्ट मोहम्मदपुर पथरा (आंवला) के किसानों की अब भी इफको प्रोजेक्ट में नौकरी मिलने की ‘आस’ बरकरार है। प्रदेश सरकार से उन्हें कोई आस नहीं दिखी तो किसानों ने अपनी बात राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के समक्ष उठायी है। किसानों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को स्पीड पोस्ट से शिकायती पत्र भेजकर इंसाफ की गुहार लगायी है। शिकायती पत्र के साथ प्रदेश सरकार द्वारा करायी गयी जांच, किसानों के हस्ताक्षरयुक्त पत्र के साथ दैनिक अमृत विचार में प्रकाशित खबरों की कटिंग भी संलग्न कर भेजी गयी है। इंजीनियर ओमशंकर सक्सेना ने पत्र भेजा है।
किसानों की ओर से भेजे गये शिकायती पत्र में कहा गया है कि इफको फैक्ट्री स्थापित हुये 36 वर्ष गुजर गये लेकिन 950 किसानों को इफको फैक्ट्री में नौकरी आज तक नहीं दी गयी। बताया कि वर्ष 1984 में इफको प्रोजेक्ट के तहत इकाई लगाने के लिये 1132 किसानों की भूमि अधिग्रहण की गयी थी। तब यूपी के मुख्यमंत्री रहे दिवंगत नारायण दत्त तिवारी ने घोषणा की थी कि जिस किसान की भूमि अधिग्रहण की गयी है, उसे भूमि का मुआवजा के अलावा इफको फैक्ट्री में स्थायी नौकरी भी मिलेगी।
इफको फैक्ट्री स्थापित होने के बाद के 180 किसानों को नौकरी मिली भी थी लेकिन 950 किसानों को नौकरी नहीं दी गयी थी। तब से लेकर आज तक वे नौकरी की आस लेकर भटक रहे हैं। भूमि अधिग्रहण होने के बाद उनके पास रोजगार के पर्याप्त साधन नहीं हैं, जिससे वह अपने परिवार की सही से देखभाल कर सकें। किसानों का शोषण और अधिकारों का हनन हुआ है।
मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मिल चुके हैं सेंथा के किसान
सेंथा गांव के किसान पिछले साल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से व्यक्तिगत तौर पर मिले थे और अपनी पीड़ा बताते हुये इफको में नौकरी दिलाने की गुहार लगायी थी। 2 दिसंबर, 2019 को लखनऊ में सीएम को जनता दर्शन में प्रार्थनापत्र भी दिया था। तब मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी एनकेएस चौहान ने डीएम बरेली को कार्रवाई करने के निर्देश भी दिये थे। एक साल में कुछ दिन कम हैं लेकिन किसानों का दर्द किसी स्तर पर नहीं समझा गया। शासन स्तर पर मामला कई बार उठाया गया लेकिन स्थानीय स्तर पर अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
