बरेली: रामगंगा नदी के रुख से सीमा विवाद में उलझे चार गांव
बरेली, अमृत विचार। रामगंगा नदी के रुख से फरीदपुर और दातागंज तहसील के कुछ गांवों के किसान सीमा विवाद में उलझ गये हैं। कई बार गांवों के बीच टकराव हो चुका है। गोलियां तक चल चुकी हैं। विवाद की गूंज लखनऊ तक पहुंच चुकी है। कुछ माह पूर्व फरीदपुर के शिवराजपुर और मानपुर त्रिलोक राजस्व …
बरेली, अमृत विचार। रामगंगा नदी के रुख से फरीदपुर और दातागंज तहसील के कुछ गांवों के किसान सीमा विवाद में उलझ गये हैं। कई बार गांवों के बीच टकराव हो चुका है। गोलियां तक चल चुकी हैं। विवाद की गूंज लखनऊ तक पहुंच चुकी है। कुछ माह पूर्व फरीदपुर के शिवराजपुर और मानपुर त्रिलोक राजस्व गांवों के किसानों ने वित्तमंत्री सुरेश कुमार खन्ना के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई थी।
मंडलायुक्त ने इसे गंभीरता से लेते हुये जिलाधिकारी को सीमा विवाद को खत्म करने के लिये स्थलीय पैमाइश कराकर रिपोर्ट देने के निर्देश दिये थे। इसके बाद अपर जिलाधिकारी प्रशासन ने टीम के साथ पैमाइश की थी। इस प्रकरण में दो बार सर्वे होने के बाद भी सीमा विवाद समाप्त नहीं हो रहा है।
दोनों तहसीलों के गांव एक दूसरे पर भूमि हथियाने का आरोप लगा रहे हैं। इस विवाद की जड़ को खत्म करने के लिये चकबंदी विभाग ने प्रस्ताव तैयार कराकर शासन को भेजा है। जिसमें शासन से चार गांवों को चकबंदी की सूची से बाहर रखने की अनुमति मांगी है। चकबंदी नहीं होगी तो सीमा विवाद स्वत: समाप्त होने की बात कही जा रही है।
चकबंदी में किसानों को भूमि का रकबा कम होने की आशंका है। रामगंगा नदी के किनारे की भूमि नदी की है लेकिन किसानों ने दबंगई के चलते कब्जा कर लिया है। उसी भूमि को लेकर फरीदपुर और दातागंज (बदायूं) तहसील के किसान आपस में टकरा रहे हैं। मानपुर त्रिलोक और शिवराजपुर गांव के किसानों ने बदायूं जनपद के बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों पर 80 बीघा भूमि पर कब्जा करने का आरोप तक लगाया है।
किसान कह चुके हैं कि सीमा विवाद क्षेत्र की भूमि का दो बार सर्वे हो चुका है। दोनों बार पूर्व के नियम ऐलू वियन व डेलू वियन (धार, धुरा) को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया था। बाढ़ नियंत्रण विभाग ने जबरन रामगंगा नदी की धारा मोड़ी है। इधर, जिला बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी प्रेमचंद्र द्विवेदी ने बताया कि सीमा विवाद को खत्म करने के लिये फरीदपुर और दातागंज के दो-दो गांवों को चकबंदी से मुक्त रखने के लिये शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। किसानों में नदी की भूमि को लेकर टकराव है। शासन से कोई निर्णय होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
