लखीमपुर खीरी : लूट नहीं, सिर्फ शांति भंग में चालान! पुलिस पर उठे सवाल
नेपालियों से सात हजार छीनने के आरोपी को ग्रामीणों ने पकड़ा, पेड़ से बांधकर जमकर पीटा, वीडियो वायरल
लखीमपुर खीरी, अमृत विचार: भारत–नेपाल सीमा क्षेत्र में घटित एक लूटकांड अब पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। निघासन क्षेत्र के गांव मुझहा में ग्रामीणों ने आर्मी लिखी बाइक सवार एक युवक को दो नेपाली नागरिकों से सात हजार रुपए लूटने के आरोप में पकड़कर पुलिस को सौंपा। इतना ही नहीं उसे पेड़ से बांधकर जमकर पीटा। पिटाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, लेकिन आश्चर्य की बात यह रही कि पुलिस ने मामले में न तो गहन जांच की, न ही लूट की रिपोर्ट दर्ज की। उल्टे आरोपी को केवल शांति भंग की धारा में चालान करने का ताना बाना बुन दिया।
ग्रामीणों के अनुसार युवक ने खुलेआम नेपालियों से रुपए छीने और भागने की कोशिश की। गुस्साए ग्रामीणों ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई के बाद पुलिस को सौंप दिया। आरोप है कि युवक की बाइक पर आर्मी' लिखा था, जिससे उसके इरादों पर और भी शक गहरा गया। बताते हैं कि पकड़ा गया इसी कोतवाली के गांव बरसोला निवासी वसीम के साथ दो अन्य युवक भी थे। तीनों युवक काफी समय से खुद को आर्मी का जवान बताकर नेपाल सीमा पर सक्रिय थे और नेपालियों को निशाना बनाते थे। लुटा पिटा नेपाली नागरिक कानूनी झंझट में न पड़ने के कारण पुलिस को तहरीर नहीं देता है। बताते हैं कि इसी बात का लाभ आरोपी उठाते थे। पकड़े गए युवक की पिटाई से लगी चोटों का पुलिस ने मेडिकल परीक्षण तो कराया, लेकिन लूट की तहरीर न मिलने का बहाना बनाकर गंभीर आरोप को नजरअंदाज कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर मौजूद नेपालियों ने यूपी 112 पुलिस से रुपए छीने जाने की शिकायत की थी, बावजूद इसके पुलिस ने उनके बयान दर्ज नहीं किए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने जानबूझकर मामला दबा दिया और आरोपी को बचाने का काम किया। लोगों का कहना है कि सीमा क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं आए दिन हो रही हैं, लेकिन पुलिस उन पर सख्ती से कार्रवाई करने के बजाय लीपापोती कर देती है। प्रभारी निरीक्षक पुष्प राज कुशवाहा ने बताया कि अभी तक कोई पीड़ित सामने नहीं आया है। न ही कोई लूट की तहरीर आई है। आरोपी का मेडिलक परीक्षण कराया गया है। पुलिस उसका शांतिभंग के आरोप में चालान करेगी।
सीमा क्षेत्र में सुरक्षा पर सवाल
भारत–नेपाल सीमा पर इस तरह की घटनाएं सुरक्षा की दृष्टि से बेहद गंभीर हैं। यदि पुलिस ही आरोपियों को राहत देती रही तो सीमा पार से आने वाले असामाजिक तत्व और अधिक सक्रिय हो सकते हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और लूट के आरोप की सच्चाई सामने लाई जाए।
