प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पहलः क्लास वन अफसर को देंगे मिड-कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम... सीखेंगे नेतृत्व, कार्यकुशलता और नजरिया बदलना

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: उत्तर प्रदेश के क्लास वन अफसर शीघ्र नेतृत्व क्षमता, कार्यकुशलता और नजरिया बदलने की ट्रेनिंग लेंगे। उप्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्लास-वन अधिकारियों के लिए पहली बार मिड-कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाने जा रहा है। इसके लिए देश के प्रतिष्ठित एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया (एएससीआई), हैदराबाद के साथ यूपीपीसीबी (उप्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) ने साझेदारी की है। इस ट्रेनिंग का पहला बैच अक्टूबर-नवंबर और दूसरा बैच फरवरी-मार्च में आयोजित होगा।

दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार यूपीपीसीबी अपने इतिहास में पहली बार क्लास-वन अधिकारियों के लिए मिड-कैरियर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. आर.पी. सिंह के बताया कि बोर्ड ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए देश की अग्रणी संस्था, एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया (एएससीआई), हैदराबाद के साथ साझेदारी की है। उन्होंने बताया कि इस अभूतपूर्व पहल का उद्देश्य अधिकारियों की विशेषज्ञता, नेतृत्व क्षमता, कार्यकुशलता और दृष्टिकोण को और मजबूत करना है।

डॉ. आर.पी. सिंह ने बताया कि यह कदम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस प्राथमिकता के अनुपालन में है, जिसमें प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों के ज्ञान, कौशल और क्षमता विकास पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों को आधुनिक चुनौतियों का सामना करने, नवीनतम तकनीकों को अपनाने और जनहित से जुड़े कार्यों में अधिक दक्षता लाने के लिए प्रेरित करेगा। यह पहल न केवल अधिकारियों की कार्यशैली और सोच को नया आयाम देगी, बल्कि संस्थान की कार्यकुशलता, पारदर्शिता और पर्यावरणीय प्रबंधन क्षमता को भी और मजबूत करेगी।

हर साल लगभग 4,500 सिविल सेवकों का प्रशिक्षण

एएससीआई एक प्रतिष्ठित संस्थान है, जो प्रतिवर्ष लगभग 4,500 सिविल सेवकों और औद्योगिक क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रशिक्षित करता है। इस सहयोग के माध्यम से यूपीपीसीबी के अधिकारियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रशिक्षण पद्धतियों का लाभ मिलेगा।

ट्रेनिंग में नियमित कार्य प्रभावित नहीं होगा

ट्रेनिंग में यह सुनिश्चित किया गया है कि नियमित कार्य प्रभावित न हों। इसके लिए कार्यक्रम को दो बैचों में आयोजित किया जाएगा। पहला बैच इसी वर्ष अक्टूबर-नवंबर और दूसरा बैच अगले वर्ष फरवरी-मार्च में आयोजित किया जाएगा।

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