बरेली: 100 करोड़ की लागत से कुतुबखाना चौराहे पर वाई शेप में बनेगा ओवरब्रिज
बरेली, अमृत विचार। कुतुबखाना चौराहे पर वाई शेप में 1200 मीटर लंबा ओवरब्रिज निर्माण को लेकर मंडलायुक्त गंभीर नजर आ रहे हैं। ऐसे में इस बार ओवरब्रिज निर्माण पर मुहर लगनी तय मानी जा रही है। 100 करोड़ रुपये की लागत से ओवरब्रिज निर्माण कराने की योजना है। यह धनराशि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से खर्च …
बरेली, अमृत विचार। कुतुबखाना चौराहे पर वाई शेप में 1200 मीटर लंबा ओवरब्रिज निर्माण को लेकर मंडलायुक्त गंभीर नजर आ रहे हैं। ऐसे में इस बार ओवरब्रिज निर्माण पर मुहर लगनी तय मानी जा रही है। 100 करोड़ रुपये की लागत से ओवरब्रिज निर्माण कराने की योजना है। यह धनराशि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से खर्च की जाएगी। ओवरब्रिज के लिये बजट की दिक्कत नहीं है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में से इतनी रकम एडवांस में रखी गई है। सेतु निगम के अधिकारी ओवरब्रिज की प्रोजेक्ट फाइल तैयार करा रहे हैं।
प्रोजेक्ट फाइल तैयार होने के बाद ओवरब्रिज पर नगर निगम की सहमति लेने के लिये महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होगी। मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद की अध्यक्षता में बैठक जल्द होने की चर्चा है। अधिकारी बताते हैं कि दो वर्ष पहले सेतु निगम ने ओवरब्रिज निर्माण के लिये सर्वे के बाद नक्शा भी तैयार कराया था। उस नक्शे को मंडलायुक्त और जिलाधिकारी देख चुके हैं लेकिन वह नक्शा वाई शेप में बना नहीं था। इधर, मंडलायुक्त ने बताया कि कुतुबखाना चौराहे पर 100 करोड़ रुपये की लागत से पुल का निर्माण कराया जाएगा। प्रोजेक्ट फाइल तैयार कराई जा रही है।
जिला अस्पताल के दोनों गेटों पर ब्रांच पुल भी थे शामिल
ओवरब्रिज निर्माण में कुतुबखाना चौराहा मुख्य केंद्र रहेगा। यहां से ओवरब्रिज कोहाड़ापीर चौराहे तक जाएगा। इधर, घंटाघर की तरफ बात करें तो कुतुबखाना चौराहे से वाई शेप में ब्रांच ओवरब्रिज कोतवाली तक और बिहारीपुर ढाल तक उतरेगा। इस बीच जिला अस्पताल के दो ब्रांच पुल भी बनने हैं लेकिन उन्हें लेकर कोई स्पष्ट बात सामने नहीं आयी है। वर्ष 2018 में मेयर डा. उमेश गौतम ने जब सर्वे कराया था, तब सेतु निगम के सर्वे में पुल की कुल लंबाई 1600 मीटर थी। इसमें मुख्य पुल 1300 मीटर का था जबकि जिला अस्पताल गेट पर दोनों ओर डेढ़-डेढ़ सौ मीटर के ब्रांच पुल भी शामिल किये गये थे।
कारोबारियों को विश्वास में लेना जरूरी
कुतुबखाना चौराहे पर ओवरब्रिज निर्माण पर सहमति लेने से पहले स्थानीय कारोबारियों को भी विश्वास में लेना जरूरी है। अक्टूबर 2018 में मेयर डा. उमेश गौतम ने ओवरब्रिज निर्माण के लिये सर्वे कराकर प्रोजेक्ट फाइल तैयार करायी थी लेकिन कारोबारियों के विरोध के चलते फाइल दबकर रह गयी। भले ही ओवरब्रिज निर्माण होने के बाद हर किसी को सहूलियत मिले लेकिन निर्माण कार्य होने के दौरान कारोबारियों को मोटा नुकसान झेलना पड़ेगा। श्यामगंज ओवरब्रिज निर्माण के दौरान कारोबारियों ने दिक्कतें झेली हैं। हालांकि, श्यामगंज ओवरब्रिज का निर्माण अभी तक के पुलों में सबसे कम समय में हुआ है।
