UP : रंग-बिरंगे समर विजीटर्स विदा, शरदकालीन मेहमान पक्षियों की होगी आमद

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सुनील यादव, पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों के अलावा पक्षियों की भी खूबसूरत दुनिया बसती है। इसमें भी खास बात यह है कि अब यहां की आबोहवा मेहमान परिंदों को भी खासी रास आने लगी है। यहीं वजह है कि यहां करीब 100 के आसपास मेहमान पक्षियों की प्रजातियां प्रवास को आने लगी हैं। गर्मी का मौसम धीरे-धीरे विदा हो रहा है, कुछ समय बाद सर्दी का मौसम भी दस्तक देने लगेगा। यहां प्रवास कर रहे दूर-दराज देशों से आए अधिकांश ग्रीष्मकालीन प्रवासी पक्षी वतन वापसी कर चुके हैं। इसी माह के अंत या फिर अगले माह की शुरूआत होते शरदकालीन प्रवासी पक्षियों आमद भी शुरू हो जाएगी।

ज्वैल ऑफ तराई कहे जाने वाले पीलीभीत टाइगर रिजर्व अपनी विशिष्ट जैव विविधिता के दम पर देश-दुनिया में टूरिज्म आईकॉन बनता जा रहा है। यहां के बाघों के बीच कई अन्य दुर्लभ स्तनधारी वन्यजीव भी है, जो शेड्यूल वन की श्रेणी में आते हैं। बेहतर संरक्षण से यहां के जंगलों में विलुप्त हो रही प्रजातियां भी दिखने लगी हैं। इन सबके बीच कुछ साल से मेहमान परिंदों को भी पीलीभीत टाइगर रिजर्व की आबोहवा रास आने लगी हैं। पक्षी प्रजातियों की बात करें तो टाइगर रिजर्व के आंकड़ों के मुताबिक यहां पक्षियों की 300 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। पक्षियों के इस अद्भुत संसार में अब दूर-दराज देशों के अलावा अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में मेहमान परिंदें भी प्रवास को आने लगे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों की मानें तो यहां प्रवास करने वाले मेहमान पक्षियों की प्रजातियों में भी धीरे-धीरे इजाफा हो रहा है।

100 से अधिक प्रजातियों का साल में दो बार आवागमन
प्रवासी पक्षियों पर लंबे समय से स्टडी करने वाली टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी के मुताबिक पीलीभीत टाइगर रिजर्व समेत आसपास क्षेत्र में सात समंदर पार समेत देश के विभिन्न राज्यों से 100 के अधिक प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां प्रवास के लिए आती हैं। यह प्रवासी पक्षी साल भर में दो बार अपनी आमद दर्ज कराते हैं। प्रवासी की यह आमद मानसून से पहले और मानसून के बाद होती है। मानसून से पूर्व आने वाले ग्रीष्मकालीन प्रवासी पक्षी मार्च-अप्रैल में आते हैं। बेहद खूबसूरत दिखने वाले ग्रीष्मकालीन प्रवासी पक्षियों ने करीब चार से पांच माह तक यहां प्रवास किया। पीलीभीत टाइगर रिजर्व समेत आसपास का क्षेत्र इन्हीं रंग-बिरंगे ग्रीष्मकालीन प्रवासी पक्षियों से गुलजार रहा। इधर टाइगर रिजर्व समेत आसपास क्षेत्रों में प्रवास करने वाली कुछ ग्रीष्मकालीन प्रवासी पक्षियों की प्रजातियों को छोड़कर अधिकांश समर विजीटर्स वतन वापसी कर चुके हैं। टीडब्ल्यूसीएस के अध्यक्ष के मुताबिक इसी माह के अंत में या फिर अगले माह की शुरूआत में ही शरदकालीन प्रवासी पक्षियों की आमद शुरू हो जाएगी। तकरीबन चार से पांच माह के प्रवास के बाद यह फरवरी के अंतिम दिनों में वतन वापसी शुरू कर देते हैं। इसमें बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी होते हैं, जो सात समंदर पार कर यहां टाइगर रिजर्व से सटे शारदा सागर डैम समेत अन्य झील-पोखरों में प्रवास करते हैं।

इन समर विजीटर्स ने की वतन वापसी
- स्लेटी लेग क्रेक
- लिटिल टर्न
- इंडियन पिट्टा
- गोल्डन ओरियोल
- बी ईटर
- जैकोबिन कुकू

इन प्रवासी पक्षियों की होगी आमद
- रेड क्रेस्टेड पोचार्ड
- कॉमन पोचार्ड
- ग्रेट क्रेस्टेड ग्रीव
- मालार्ड
- नार्दर्न पिनटेल
- कॉमन सेंडपाइपर आदि।

ग्रीष्मकालीन प्रवासी पक्षी अफ्रीका समेत देश के हिमालय समेत विभिन्न राज्यों से यहां प्रवास को आते हैं। इसमें लोकल माइग्रेटरी पक्षियों की संख्या अधिक होती है। इनमें कुछ प्रजातियों को छोड़कर अधिकांश ग्रीष्मकालीन प्रजातियों के पक्षी प्रवास पूरा कर वापस लौट गए हैं। इसी माह के अंत में या फिर अगले माह से शरदकालीन प्रवासी पक्षियों की आमद शुरू हो जाएगी। इनकी संख्या ग्रीष्मकालीन प्रवासी पक्षियों से कहीं अधिक होती है। वर्ष भर में दो बार इन प्रवासी पक्षियों की आमद होती है। - अख्तर मियां खान , अध्यक्ष, टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी।

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