Moradabad : बोरे में मिली नवजात को मिली नई जिंदगी, अब जाएगी दत्तक गृह
मुरादाबाद, अमृत विचार। जिंदगी की जंग जीतने वाली मासूम बच्ची, जो 20 अगस्त को कटघर थाना क्षेत्र के देहरी गांव में बोरे में बंद मिली थी, अब पूरी तरह स्वस्थ होकर नई जिंदगी की ओर बढ़ चली है। मंगलवार को जिला महिला अस्पताल के सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) से बच्ची को डिस्चार्ज कर दिया गया। एसएनसीयू प्रभारी की निगरानी में उसे चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम को सौंपा गया।
चाइल्ड लाइन सुपरवाइजर शाहनवाज आलम और केस वर्कर अंजू ने बताया कि बच्ची को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के निर्देश पर दत्तक गृह भेजा जाएगा। वहां से आगे उसकी एडॉप्शन (गोद लेने) की प्रक्रिया पूरी होगी। यानी अब इस बच्ची के लिए एक नया परिवार और सुरक्षित भविष्य तय किया जाएगा। बच्ची जब अस्पताल लाई गई थी तो उसकी हालत बेहद गंभीर थी। बोरे में बंद रहने के कारण उसका शरीर ठंडा पड़ रहा था और सांसें धीमी थीं। महिला अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद पीडियाट्रिशन डॉ. प्रतीक ने तुरंत इलाज शुरू किया। अगले दिन से उसकी देखभाल की जिम्मेदारी डॉ. सना और डॉ. किरन पांडे व उनकी टीम ने संभाली। शुरुआत में बच्ची दूध भी नहीं पी पा रही थी, फीडिंग ट्यूब के सहारे पोषण दिया गया। स्टाफ नर्सों ने रात-दिन देखभाल कर उसे नया जीवन दिया। धीरे-धीरे हालत सुधरने लगी और पिछले हफ्ते बच्ची हर दो घंटे में खुद दूध पीने लगी। सभी पैरामीटर सामान्य होने के बाद डॉक्टरों ने डिस्चार्ज करने का निर्णय लिया।
नई जिंदगी की ओर कदम
एसएनसीयू से निकलते समय वहां मौजूद स्टाफ की आंखें नम हो गईं। जिन्होंने 28 दिन तक उसे अपने बच्चे की तरह पाला, वे विदाई के वक्त भावुक हो उठे। स्टाफ नर्स रुबी ने कहा अब यह बच्ची सिर्फ मरीज नहीं रही, हमारे परिवार का हिस्सा बन गई थी। लेकिन हमें खुशी है कि उसका भविष्य सुरक्षित हाथों में जाएगा। चाइल्ड लाइन की टीम ने बच्ची को गोद में लेते हुए कहा कि अब उसकी परवरिश दत्तक गृह में होगी। वहां से कानूनी प्रक्रिया के बाद उसे एक नया परिवार मिलेगा। सुपरवाइजर शाहनवाज आलम ने बताया कमेटी के निर्देश के अनुसार बच्ची को दत्तक गृह में रखा जाएगा। वहां पूरी देखभाल और सुरक्षा के बीच एडॉप्शन की कार्रवाई पूरी होगी।
कई चेहरे बने गवाह
इस मौके पर चाइल्ड लाइन टीम के अलावा अस्पताल के कई कर्मी मौजूद रहे। ललित कुमार, अमित, सिस्टर रूबी और अन्य स्टाफ ने बच्ची को विदाई दी। सभी के चेहरे पर संतोष और गर्व झलक रहा था कि उन्होंने मिलकर एक मासूम को मौत के मुंह से बाहर निकालकर जिंदगी दी।
