UP : सहसवान क्षेत्र में महावा नदी की विनाशलीला से दहशत में आए लोग

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Edited By Amrit Vichar
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बदायूं, अमृत विचार। पहाड़ों पर फिर से बारिश शुरू हो चुकी है जिससे ऊपर से पानी हरिद्वार बैराज में बढ़ने लगा है। बिजनौर और नरौरा बैराज में एक बार फिर ओवरफ्लो होने से गंगा में अधिक मात्रा में पानी छोड़ा जाने लगा है। जिससे उसहैत के अहमदनगर बिछौरा में आधा दर्जन से अधिक मकान गंगा में समा गए हैं जबकि सहसवान में उपजाऊ जमीन का कटाव होने से किसान परेशान हैं। किसानों ने जिला प्रशासन से राहत सामग्री की गुहार की है।

मंगलवार को नरौरा से करीब एक लाख क्यूसेक पानी गंगा नदी में छोड़ा गया है जिससे हालात फिर से बिगड़ने लगे हैं। बाढ़ ने सहसवान और उसहैत क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी है। जिससे लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। सहसवान तहसील के गंगा किनारे बसे गांवों में खतरा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जलस्तर कम होने के बाद एक बार फिर बढ़ा है।अब गंगा का कटान गांवों को अपनी चपेट में ले रहा है। दर्जनों घर गंगा की धारा में समा चुके हैं। क्षेत्र के खागी नगला, जमुनी समेत कई गांवों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। बाढ़ का पानी घटने के बाद फिर बढ़ गया है। गंगा का तेज बहाव गांवों की जमीन और मकानों को काट रहा है। 

ग्राम वासियों का कहना है कि बाढ़ के दौरान पानी का बहाव धीमा था, लेकिन जैसे ही जलस्तर घटा, गंगा की धारा सीधे गांवों की मिट्टी को काटने लगी। नतीजा यह हुआ कि खागी नगला के कई घर पलभर में ढहकर गंगा में समा गए। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि लोग अपने घरों को खुद ही गिरा रहे हैं, ताकि ईंट और लकड़ी जैसी चीज़ों को बचाया जा सके। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस मदद नहीं मिली है।

कटान की इस त्रासदी ने न सिर्फ लोगों को बेघर कर दिया है, बल्कि उनके भविष्य पर भी संकट खड़ा कर दिया है। गांवों में दहशत का माहौल है और लोग अपनी गृहस्थी को डूबते हुए देखने को मजबूर हैं। गंगा किनारे यह कटान प्रशासन और शासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।

उसहैत क्षेत्र के गांव अहमदनगर बिछौरा में गंगा ने कई मकान अपनी चपेट में ले लिए हैं। लगभग आधा दर्जन मकानो का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। यहां पर गंगा की धार बह रही है। आसपास के तमाम गांवों में बाढ़ ने फिर से तबाही मचा दी है। जटा के कई मकान और पेड़ गंगा में समा चुके हैं। प्रेमी नगला गांव की दो सौ बीघा उपजाऊ जमीन गंगा में चली गयी है। जबकि अन्य गांवों की हजारों हेक्टेयर जमीन गंगा की धार में विलीन हो गयी है। जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।

हजारों हेक्टेयर जमीन गंगा में समाई
उसहैत क्षेत्र के तटवर्ती गांवों में करीब एक माह से बाढ़ से तबाही मची है। इस क्षेत्र के करीब आठ गांवों की पांच हजार हेक्टेयर जमीन गंगा निगल चुकी है। करीब दर्जन भर मकान पानी में समा चुके हैं। इसी तरह सहसवान में करीब दो हजार हेक्टेयर से अधिक उपजाऊ जमीन महावा नदी की भेंट चढ़ चुकी है। जबकि दातागंज क्षेत्र में रामगंगा का पानी एक हजार हेक्टेयर के आस पास उपजाऊ जमीन को खत्म कर चुका है। इस जमीन पर किसान जब खेती नहीं कर पाएंगे। यह बाढ़ खंड का अनुमानित आंकड़ा है जबकि तहसील प्रशासन के अभिलेखों में गंगा किनारे का रकबा दर्ज है जिसका आकलन किया जा रहा है।

सहायक अभियंता, बाढ़ खंड नेशपाल ने बताया कि नरौरा से मंगलवार को फिर पानी एक लाख क्यूसेक के आसपास छोड़ा गया है। जिससे गंगा में फिर से उफान आना तय है। आज छोड़ा गया पानी 24 घंटे में गंगा में पहुंच जाएगा उसके बाद स्थिति फिर संवेदनशील हो जाएगी। सहसवान और उसहैत क्षेत्र में बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है। जो तहसील प्रशासन देख रहा है।

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