बाराबंकी: सेवारत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर सौंपा ज्ञापन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बताया अव्यावहारिक
बाराबंकी, अमृत विचार। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के तत्त्वावधान में शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अव्यावहारिक बताते हुए सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष राजरानी रावत, सांसद तनुज पुनिया व भाजपा जिलाध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन पूर्व से नियुक्त शिक्षकों के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा टीईटी उत्तीर्ण करने के आदेश को वापस लेने तथा भारत सरकार से शिक्षा अधिकार नियमावली में संशोधन कर देशभर के शिक्षकों की सेवा सुरक्षित किए जाने की मांग को लेकर सौंपा गया।
संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. राकेश सिंह के नेतृत्व में जनपदीय व ब्लॉक स्तरीय पदाधिकारियों ने ज्ञापन में कहा कि शिक्षकों के बारे में गलत तथ्य प्रस्तुत कर न्यायालय को गुमराह किया गया, जिससे करोड़ों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री और बेसिक शिक्षा मंत्री को संबोधित ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों के पक्ष में वास्तविक व तात्कालिक तथ्यों को सामने रखते हुए नियमों में संशोधन की मांग की।

इस अवसर पर जिला मंत्री उमानाथ मिश्र, कोषाध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव, प्रांतीय संगठन मंत्री डॉ. देवेंद्र द्विवेदी, उपाध्यक्ष चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, संगठन मंत्री विश्वजीत सिंह, जय कुमार, ललित पांडे, आशुतोष नाथ मिश्र, हनुमंत अवस्थी, पवन मिश्र, अयोध्या प्रसाद, दिलीप तिवारी, गुनित शर्मा, अंकुर गिरि, प्रदीप वर्मा सहित कई शिक्षक पदाधिकारी मौजूद रहे।
टीईटी से मुक्ति की मांग को लेकर शिक्षकों ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ जनपद इकाई ने जिलाध्यक्ष अभिषेक सिंह के नेतृत्व में जिलाधिकारी प्रतिनिधि के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को संबोधित ज्ञापन भेजा। इसमें 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से मुक्त करने की मांग उठाई। संघ ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 को पारित आदेश संख्या 1385/2025 के तहत सभी शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा सेवा समाप्त करने का प्रावधान है।

यह आदेश उन शिक्षकों पर भी लागू किया गया है, जो नियमानुसार सभी शैक्षिक योग्यताएं पूर्ण कर 15-20 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। संघ का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा-4 के अनुसार 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू नहीं होती, क्योंकि उत्तर प्रदेश में टीईटी की शुरुआत 29 जुलाई 2011 से हुई थी। ऐसे में इन शिक्षकों को इससे मुक्त रखा जाना न्यायसंगत और मानवीय होगा।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि वर्षों की निष्ठापूर्वक सेवा देने वाले शिक्षकों पर अचानक परीक्षा थोपना न केवल अनुचित है, बल्कि उनके आत्मसम्मान और मनोबल पर भी आघात करता है। संघ ने केंद्र सरकार से अपील की है कि ऐसे शिक्षकों को टीईटी से छूट देने हेतु शीघ्र अध्यादेश लाया जाए। इस अवसर पर जिला मंत्री नीरज वर्मा, अफजाल अहमद, मान सिंह, अशोक सिंह, मुस्तफा खान, सुधीर कुमार, आशुतोष, श्रद्धा मणि, अंजना मिश्रा, निधि राज, रवि वर्मा, शैलेन्द्र कुमार, विजय सिंह, अर्शिया खातून, अमित वर्मा सहित हजारों शिक्षक उपस्थित रहे।
