बरेली : चूल्हा-चौका करने वाली 33 हजार महिलाएं बन गईं लखपति

Amrit Vichar Network
Edited By Pradeep Kumar
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स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर पांच साल में बनाई अलग पहचान, आर्थिक तरक्की करके परिवार के लिए भी बन रहीं संबल

बरेली, अमृत विचार: लखपति दीदी योजना ने ग्रामीण क्षेत्र की उन महिलाओं की जिंदगी बदल दी है, जो कभी घर में चूल्हा-चौका तक सीमित थीं। ये महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं और आर्थिक आजादी की राह पर आगे बढ़ रही हैं। इस योजना के तहत, महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जो आंकड़े मिले हैं, उसके मुताबिक योजना के तहत जिले में 33 हजार महिलाएं लखपति बन चुकी हैं। ये महिलाएं न सिर्फ स्वयं आर्थिक तरक्की कर रही हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक डोर भी बखूबी संभाल रही हैं। वे कृषि कार्य से जुड़कर, गैर कृषि कार्य और व्यवसाय से जुड़ी हैं और लाखों रुपये कमा रही हैं।

कलारी की कोमल 19 समूह का कर रहीं नेतृत्व
बिथरी ब्लॉक के कलारी गांव की कोमल मौर्य बताती हैं कि शादी के बाद कई वर्षों तक घर की चहारदिवारी में ही सिमटी रहीं। घर का कामकाज संभालती रहीं। 2019 में जब एक टीम समूह बनाने के लिए गांव में आई तब उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। इसके बाद समूह सखी की जिम्मेदारी मिली। तब से जिंदगी ने नया मोड़ लिया। समूह से जुड़ने के बाद कोमल ने नियमित रूप से बैठकों में जाना शुरू किया। उन्हें रोजगार के नए-नए साधनों के बारे में जानकारी मिली। कोमल वर्तमान में सिलाई, कृषि कार्य समेत अन्य कार्यों से जुड़े 19 समूह का नेतृत्व कर रही हैं। हर समूह में 10 से 12 सदस्य हैं। कलारी में कोमल लखपति दीदी के नाम से पहचानी जाती हैं। वह सीएलएफ की मैनेजर भी हैं।

अब किसी परिचय की मोहताज नहीं है राधा रानी
बांके बिहारी समूह की संचालिका राधा रानी की 2021 से पहले खुद की कोई पहचान नहीं थी। इसी साल स्वयं सहायता समूह की जानकारी मिली। इसके बाद पार्लर का प्रशिक्षण लेकर आजीविका शुरू करने के लिए समूह का गठन किया है। आज वह स्वास्थ्य सखी भी हैं। महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने में वह अहम भूमिका निभा रही हैं। कलारी गांव में राधा रानी लखपति दीदी के नाम से पहचानी जाती हैं। 19 समूह का नेतृत्व कर रही हैं। कोई गाय भैंस पालन तो कोई कास्मेटिक का व्यवसाय कर रहा है। कई महिलाओं ने पार्लर खोल रखा है। राधारानी कहती हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह लखपति दीदी के नाम से जानी जाएंगी। आज पूरा गांव लखपति दीदी के नाम से जानता है।

लखपति दीदी बनी प्रियंका को सीएम कर चुके सम्मानित
शेरगढ़ के ग्राम डेलपुर की प्रियंका कुमारी कभी घर में चूल्हा-चौका तक सीमित थीं। लेकिन 2021 में महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई। प्रिया स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष बनने के बाद प्रियंका का बीसी सखी के पद के लिए चयन हुआ और एनआरएलएम के माध्यम से समूह के खाते में 75 हजार की धनराशि उपलब्ध कराई गई। प्रियंका लखपति दीदी के नाम से जानी जाती हैं। प्रति माह 19 हजार रुपये कमीशन पाती हैं। वह बताती हैं कि इस कमाई से परिवार का अच्छी तरह से पालन-पोषण कर रही हैं। बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रही हैं। उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो गई है। जनवरी माह में बरेली आगमन पर सीएम ने उन्हें सम्मानित भी किया था।

महिलाएं अब सिर्फ चूल्हा-चौका तक सीमित नहीं हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं अलग-अलग क्षेत्रों में अच्छा काम कर रही हैं। करीब 33 हजार महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर लखपति दीदी के नाम से पहचानी जा रही हैं। -गुरदीप, जिला प्रबंधक, एनआरएलएम।

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