GSVSS PGI : क्रोनिक पेन से रोगी के मन में असुरक्षा बन रही अवसाद का कारण

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जीएसवीएसएस पीजीआई में पेन मेडिसिन विभाग में आ रहे कई मरीज

कानपुर, अमृत विचार। क्रोनिक पेन के कारण मरीजों के मन में असुरक्षा की भावना घर करने से उनको यह महसूस हो रहा है कि वह अब कभी ठीक नहीं हो पाएंगे। ये भावना मरीजों के अंदर बैठने से अवसाद का कारण बन रही है। जबकि क्रोनिक पेन, अन्य सभी क्रोनिक रोग जैसे शुगर, ब्लड प्रेशर व हृदय रोग की तरह ही आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि कई बार क्रोनिक पेन का जड़ से इलाज संभव नहीं हो पता है। वहीं, मरीजों को दर्द से राहत पहुंचाने के लिए मिनिमली इनवेसिव पेन व स्पाइन इंटरर्वेशन का इस्तेमाल पीजीआई में किया जा रहा है। 
 
जीएसवीएसएस पीजीआई के पेन मेडिसिन विभाग में प्रतिदिन औसतन 200 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमे से अधिक लोगों को नसों से संबंधित समस्या रहती है। इसके अलावा लगातार या बार-बार दर्द होना (तीव्रता और प्रकार में भिन्नता, चुभन, जलन), थकान, नींद की समस्या, भावनात्मक बदलाव, भूख न लगना, खाना बेस्वाद लगना या वजन कम होना, मधुमेह, फाइब्रोमायल्गिया या कैंसर आदि की समस्या से ग्रस्त होकर भी कई मरीज इलाज केलिए पहुंच रहे हैं।
 
पेन मेडिसिन विभाग के प्रभारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि क्रोनिक पेन (दीर्घकालिक दर्द) वह दर्द होता है, जो तीन महीने या उससे भी अधिक समय तक मरीज को परेशान करता है। ओपीडी में आने वाले क्रोनिक पेन से 20 से 30 फीसदी मरीज पीडित है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में प्रत्येक पांच में से एक मरीज क्रोनिक पेन से ग्रसित है। सटीक जानकारी पर ही इस समस्या का समाधान हो सकता है या उसपर नियंत्रण पाया जा सकता है।
 
बताया कि क्रोनिक पेन के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक वर्ष में औसतन तीन हजार मरीजों का इलाज पीजीआई में किया गया है, जिनमे से समस्या से ग्रस्त मरीजों में अवसाद की समस्या बढ़ती हुई भी मिली है। हालांकि सटीक इलाज से पुराने दर्द को कम करने से संबंधित चिंता और अवसाद को कम किया जा सकता है, जो दर्द से पीडित लोगों के लिए आम समस्याएं हैं। औसतन प्रतिवर्ष 1200 मरीजों को मिनिमली इनवेसिव पेन व स्पाइन इंटरर्वेशन से लाभ पहुंचाया गया है।  
 
लंबे समय तक चलने वाली दवाओं से मिलती मुक्ति 
डॉ.चंद्रशेखर ने बताया कि मिनिमली इनवेसिव पेन व स्पाइन इंटरवेंशन विधि से किसी भी प्रकार के क्रोनिक पेन व कारणों का इलाज संभव है। लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती है। इलाज के बाद लम्बे समय तक आराम करने की आवशयकता नहीं पड़ती। लम्बे समय तक दर्द नाशक दवाओं के सेवन व दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलती है। किसी भी बढे चीरे या टांके और इलाज के दौरान पूर्ण रूप से बेहोशी जरूरत नहीं होती है। रक्तस्त्राव और तंत्रिका क्षति जैसी जटिलताओं का जोखिम कम होता है। उन्नत इमेजिंग जैसे कि फ्लोरोस्कोपी या अल्ट्रासाउंड, डॉक्टरों को दर्द के स्रोत तक पहुंचाने में सहायक होता है, जिससे प्रभावशीलता अधिकतम हो जाती है।
 
इन रोगों में मिल रहा है आराम 
 
  1. सिर दर्द - जिन मरीजों को दवाओं से राहत नहीं मिल रही हो।
  2. चेहरा का दर्द - रेडियो-फ्रिकुसीन्सी न्यूरो-मॉडुलेसन या बलून कम्प्रेशन तकनीक
  3. गर्दन दर्द- रेडियो फ्रिक्वेंसी न्यूरो मॉडुलेसन विधि, सर्वाइकल एपीड्ररल न्यूरो-प्लास्टी
  4. फ्रोजन शोल्डर - रेडियो फ्रिक्वेंसी न्यूरो मॉडुलेसन विधि
  5. कंधों हाथों का दर्द - सर्वाइकल एपीड्ररल न्यूरो-प्लास्टी
  6. ऑस्टियोपोरोसिस के कारण रीढ़ के फ्रैक्चर में क्यूटेनियस बैलून काइफोप्लास्टी
  7. कमर दर्द में ट्रांस फोरामीनल न्यूरो-प्लास्टी, इंट्रा डिस्कल ओजोन डिस्कॉलयसिस व आदि
  8. साईटिका में ट्रांस फोरामीनल न्यूरो-प्लास्टी, पर क्यूटेनियस स्पाइन एंडोस्कोपी
  9. घुटने का दर्द में जैनीकुलर नर्व रेडियो फ्रिक्वेंसी न्यूरो-मॉडुलेसन, इंट्रा आर्टिक्यलर पौआरपी
  10. एड़ी दर्द या प्लांटर में फेसीआईटीस रेडियो फ्रिक्वेंसी न्यूरो मॉडुलेसन
  11. लिवर, गाल ब्लैडर या पैनक्रियास कैंसर से होने वाला दर्द में आराम
  12. गर्भाशय  या मल द्वार कैंसर के मरीजों को दर्द से राहत।

 

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