बरेली यूनिवर्सिटी में शुरू हुई एक वर्षीय ओरल आंकोलॉजी एंड रिकंस्ट्रकटिव सर्जरी फेलोशिप

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

अमृत विचार, बरेली। कैंसर के सबसे सामान्य रूपों में से एक है मुंह का कैंसर। यह कैंसर मुंह के किसी भी हिस्से में हो सकता है, जैसे- गाल और मसूड़ों के अंदर। यह बीमारी महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार देश में कैंसर के लगभग 15 प्रतिशत मरीज …

अमृत विचार, बरेली। कैंसर के सबसे सामान्य रूपों में से एक है मुंह का कैंसर। यह कैंसर मुंह के किसी भी हिस्से में हो सकता है, जैसे- गाल और मसूड़ों के अंदर। यह बीमारी महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार देश में कैंसर के लगभग 15 प्रतिशत मरीज मुंह के कैंसर से पीड़ित है।

रोहिलखंड मेडिकल कालेज में पिछले दो साल से ओरल कैंसर के सैकड़ों मरीज ठीक हो चुके है। कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ते देख कैंसर विशेषज्ञ डा. अर्जुन अग्रवाल ने समाज में अन्य चिकित्सक और सर्जनों को फेलोशिप के जरिए प्रशिक्षण देकर मुंह के कैंसर के मरीजों को बेहतर इलाज प्रदान करने का सराहनीय कदम उठाया है, जिसमें बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में ओरल आंकोलॉजी एंड रिकंस्ट्रकटिव सर्जरी में फेलोशिप की शुरुआत की है। इस फेलोशिप की समयावधि एक वर्ष रहेगी।

फेलोशिप के तहत बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने तीन सीटे आंवटित की हैं, जिसके लिए शनिवार को पांच सदस्यीय पैनल ने साक्षात्कार के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन किया। पैनल में कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. अर्जुन अग्रवाल, डा. अनुराग यादव, प्राचार्य (इंस्टीटयूट ऑफ डेंटल साइंस), एसोसिएट प्रोफेसर (पैथोलॉजी) डा. चीना गर्ग, प्रोफेसर (ओरल सर्जरी) डा. सत्यजीत, प्रोफेसर (ईएनटी) डा. अभिनव श्रीवास्तव ने अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया। इन तीन सीटों पर नई दिल्ली के डा. अक्षय शर्मा, गोला गोकर्णंनाथ खीरी के डा. आकाश राजपूत, बिहार के डा. गौरव विशाल को साक्षात्कार प्रक्रिया में चयनित किया गया।

फेलोशिप के लिए क्या होता है मानक

इस फेलोशिप के लिए चयन के लिए अभ्यर्थी को एमएस इन जनरल सर्जरी, एमएस इन ईएनटी, एमडीएस इन ओरल मैक्सीफेसियल सर्जरी की न्यूनतम योग्यता है।

क्या प्रशिक्षण होगा फेलोशिप में

फेलोशिप में चयनित अभ्यर्थियों को ओरल कैंसर में ऑपरेशन करने, सर्जरी के दौरान फ्लैप भरने, ओरल कैसर में आवश्यक रेडियोथैरेपी, कीमोथेरेपी, नशे के पदार्थो से छुड़वाने जैसे प्रशिक्षण दिए जाएंगे। इस दौरान फेलोशिप कर रहे फेलोस को पेपर पब्लिकेशन और थिसिस भी तैयार करनी होगी।

संबंधित समाचार