पीलीभीत: गुणवत्ता बेहतर या खराब, एमएसपी का नहीं लाभ...1200 और 1400 में भी बिका धान

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत, अमृत विचार। साप्ताहिक अवकाश के बाद मंडी समिति में क्रय केंद्रों पर धान की तौल शुरू हो गई। आलम ये रहा कि केंद्रों के बाहर धान लदी ट्रैक्टर ट्रॉली लिए किसान अपनी बारी आने का इंतजार कर परेशान दिखे। आढ़तें भी गुलजार रही। उन पर किसान के धान की लगवाई जा रही बोली औपचारिकता की ओर इशारा कर गई। दोपहर में तो राइस मिलर्स के कर्मचारी-आढ़ती की मौजूदगी में ही किसान का धान औने-पौने दाम पर बिकता रहा। नतीजतन धान की गुणवत्ता ठीक हो या फिर खराब..एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) नहीं मिल सका। गुणवत्ता में कमी का हवाला देकर कुछ किसानों को तो अपने धान के महज 1200 से 1400 रुपये ही मिल सके। अधिकतम बोली भी 1800-1850 तक सीमित रही, जोकि एमएसपी से काफी कम रही।

धनतेरस, दिवाली भैयादूज आदि त्योहारी सीजन में छह दिन तक क्रय केंद्र बंद रहे। जिसके चलते मंडी समिति में बड़ी संख्या में धान की आवक हुई। कई दिन से किसान अपने धान की बिक्री के लिए रखवाली कर रहे हैं। सुविधाएं न मिलने की बात भी कह चुके हैं। रविवार को भी अवकाश रहा। इसके बाद सोमवार को क्रय केंद्रों पर धान की खरीद चालू करा दी गई। पहले से ही धान लदी ट्रैक्टर ट्रॉलियां बारी का इंतजार कर रही थी, उसके बाद अन्य किसान भी पहुंच गए। केंद्रों पर कर्मचारी मौजूद रहे और धान की तौल भी चलती रही। मगर, इसकी गति धीमी रही। जिसे लेकर किसानों को ये चिंता सताती रही कि कहीं आज भी ऐसा न हो कि उनका नंबर ही न आए। 

हालांकि केंद्र प्रभारी धीमी गति से तौल बात से इन्कार करते रहे। आढ़तों पर भी धान के ढेर लगे रहे। जिनकी बोली लगाकर बिक्री में औपचारिता दिखी। इसमें मंडी और क्रय केंद्र की टीम अधिकांश जगह नहीं थी। धान की नमी हाथ से छूकर मापी जाती रही और दाम लगाए जाते रहे। भैंरोकलां के प्रभु दयाल का धान 1200 रुपये, रामसागर का 1300 और विजयपाल 1400 रुपये के हिसाब से बिका। जिम्मेदारों का कहना था कि उस धान की गुणवत्ता खराब रही होगी। 

जबकि मौजूद कुछ किसान कम से 1500 रुपये के लायक धान बताते रहे। वहीं, बेहतर बताए जाने वाले धान की कीमत भी 1800-1850 रुपये तक सीमित रही। जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 निर्धारित हैं। फिलहाल धान की क्वालिटी बेहतर हो या फिर खराब उसके दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी कम ही रहे। क्रय केंद्रों पर भी किसान बार-बार अपने धान की तौल कराने के बारे में जानकारी करते रहे।

हमारी रहती है टीम, मगर हर वक्त मुमकिन नहीं
मंडी सचिव प्रवीण कुमार अवस्थी का कहना है कि आढ़त किसान के धान की बोली लगवाते वक्त उनकी टीम रहती है। रोस्टर के हिसाब से कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सुबह के वक्त टीम बोली लगाने गई थी और इसकी वीडियो भी है। मगर स्टाफ इतना नहीं है कि हर वक्त बोली लगाने के दौरान मंडी के कर्मचारी उसमें मौजूद रह सकें। सोमवार की बोली 1800 से 1850 तक रही है। 1200 से 1400 में बिके धान को लेकर पहले अनभिज्ञता जताई और बाद में ये तर्क दिया कि धान की गुणवत्ता खराब रही होगी।

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