पैकेज पर होता घायल पशुओं की मौत का धंधा... एनिमल लवर्स बताकर अवैध रूप से बढ़ा रहे NGO के नाम पर गोरखधंधा

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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प्रशांत सक्सेना/ लखनऊ, अमृत विचार : सड़क पर घायल और तड़पते 'बेजुबानों' देख अक्सर लोग आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन इनके नाम पर कमाने-खाने वालों को ऐसी घटनाओं की तलाश रहती है। इनके पास खुद का न एनजीओ है और न ही संसाधन, जो अपने को कथित पशु प्रेमी बता दलाली कर अवैध रूप से संचालित एनजीओ का दायरा बढ़ा रहे हैं।

इनका पूरा खेल वाट्सएप ग्रुप, फेसबुक व इंस्टाग्राम पर सूचनाओं के आधार पर चलता है। इनके द्वारा क्षेत्रों में सक्रिय लोग इन सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर घायल, बीमार व तड़पते पशुओं की फोटो, वीडियो और लोकेशन उपचार कराने के लिए शेयर करते हैं और इनके द्वारा सोशल मीडिया पर जोड़े गए वास्तविक पशु प्रेमियों को भावुक कर लाखों रुपये क्यूआर कोड, बैंक एकाउंट व मोबाइल नंबर के माध्यम से बंटोरते हैं। 

अच्छा-खासा पैसा इकट्ठा होने पर यह अवैध अस्पताल की तरह संचालित एनजीओ के शेल्टर होम पर भेज 10 से 15 हजार रुपये का ठेका देकर उपचार व संरक्षण कराते हैं। वहां से फोटो व वीडियो मंगाकर दवा, खाना-पीना व संरक्षण करने के रुपये सोशल मीडिया से बंटोरते हैं। फिर मरने पर अंतिम संस्कार के नाम पर वसूली शुरू हो जाती है।

खास बात यह है कि उपचार और संरक्षण करने वाला एनजीओ भी ठीक इसी तर्ज पर निजी चिकित्सक से महंगा इलाज दिखाकर अपने सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर दुकान सजाकर लोगों से लाखों रुपये इकट्ठा करते हैं। यह धंधा सिर्फ लखनऊ, कानपुर जैसे महानगरों में ही नहीं बल्कि छोटे जिलों में भी चल रहा है।

लखनऊ व आसपास जिलों में फैला नेटवर्क

लखनऊ में सैकड़ों की तादाद में दलाली करने वाले सक्रिय कथित पशु प्रेमी में कोई लखनऊ तो कोई आसपास जिलों के बिना मानक शेल्टर होम पर घायल पशुओं को भेजते हैं। सबसे अलग-अलग दाम हैं। वहां से सही न के बराबर होकर आते हैं न वापस मंगाए जाते हैं, क्योंकि सड़क से उठाए पशुओं को कोई मालिक या स्थल नहीं न ही कोई पूछने वाला है। बाहरी जिलों में पशुओं को कैब से भेजा जाता है।

एक कार को छोटे पशुओं के लिए बनाई

लखनऊ में बिना मानक एनजीओ के पास रेस्क्यू करने के वाहन हैं न संसाधन। सभी ने एक कार चालक को अपने साथ जोड़ रखा है, जो अपनी कार से एंबुलेंस की तर्ज पर घायल-बीमार पशुओं को उनके शेल्टर होम पहुंचाता है। वह 2000 से 2500 रुपये तक लेता, यदि कोई व्यक्ति अपने साधन या आटो से भेजता है तो यह लोग रास्ते में मरने की बात कहकर गुमराह करते। यह चालक सभी शेल्टर होम में मरने वाले पशुओं का अंतिम संस्कार भी कार से ले जाकर करता है, लेकिन किस आधार से इसकी किसी को जानकारी नहीं है।

बिना पंजीकृत चिकित्सक के पशुओं का कोई भी उपचार नहीं कर सकता है। ऐसे खुले अवैध शेल्टर होम की जांच शुरू कर दी है। नियम विरुद्ध कार्य मिलने पर कार्रवाई करेंगे।- डॉ. सुरेश कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।

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