World Stroke Day: अनियमित जीवनशैली से युवा हो रहे स्ट्रोक के शिकार, विशेषज्ञों ने दी सलाह... हार्ट अटैक की तरह ब्रेन स्ट्रोक भी गंभीर

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Edited By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार : ब्रेन स्ट्रोक को हार्ट अटैक की तरह तरह गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि जिस तरह सीने में दर्द होने पर हार्ट अटैक की समस्या हो सकती है, उसी तरह ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण जानना भी जरूरी है। लक्षण दिखने के तीन-चार घंटे के अंदर मरीज स्ट्रोक रेडी सेंटर पहुंच जाने से लकवा की संभावनाएं काफी हद तक कम हो जाती हैं। ये जानकारी मंगलवार को विश्व स्ट्रोक दिवस के एक दिन पूर्व केजीएमयू के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ.हैदर अब्बास ले साझा की।

लक्षण दिखने के 3-4 घंटे में अस्पताल पहुंचने पर कम हो जाती है लकवा की संभावना

डॉ. हैदर ने कहा कि भागमभाग भरी जिंदगी के कारण रक्तचाप प्रभावित हुआ है। इसने ब्रेन स्ट्रोक की आशंका को बढ़ा दिया है। ब्रेन स्ट्रोक की कम से कम आयु में भी लगातार गिरावट होती जा रही है। जागरुकता से ही ब्रेन स्ट्रोक के खतरे को कम किया जा सकता है। बचाव के लिए बी-फास्ट की जानकारी होना जरूरी है।

शराब और धूम्रपान से स्ट्रोक का खतरा अधिक

केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस डॉ. प्रेमराज सिंह ने बताया स्ट्रोक किसी भी आयु वर्ग के लोगों को हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान, डायबिटीज, मोटापा और बहुत ज्यादा शराब पीने से इसका खतरा बढ़ जाता है। ट्रॉमा सेंटर में प्रतिदिन पांच से सात ऐसे मरीज आ रहे हैं। सर्दियों में ऐसे मरीजों की संख्या 12 से 15 तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा हमारी सेहत हमारे हाथों में होती है। फिट रहने के लिए स्वस्थ जीवनशैली और खानपान इन पर ध्यान दे दिया, तो लंबे समय तक बीमारियों से बचे रह सकते हैं। हेल्दी डाइट बहुत जरूरी है। डाइट में फल, सब्जियां और साबुत अनाज को शामिल करें।

नियमित स्वास्थ्य चेकअप जरूरी

डॉ. प्रेमराज ने नियमित तौर पर सेहत की जांच कराने पर जोर देते हुए कहा कि इससे स्ट्रोक के खतरों को कम किया जा सकता है। रूटीन हेल्थ चेकअप से कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर आदि चीजों के बारे में पता चलता रहता है। जिससे किसी तरह का उतार-चढ़ाव हो, तो उसे जरूरी चिकित्सीय सहायता की मदद से सही किया जा सके। इसके अलावा नियमित व्यायाम से भी स्ट्रोक से बचा जा सकता है।

दो तरह का होता होइ स्ट्रोक

इस्केमिक स्ट्रोक: यह तब होता है जब मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनी में रक्त का थक्का (क्लॉट) जम जाता है, जिससे रक्त प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। यह सबसे आम प्रकार का स्ट्रोक है। करीब 85 फीसदी मरीज इसी स्ट्रोक के होते हैं।

रक्तस्रावी स्ट्रोक: यह तब होता है जब मस्तिष्क में कोई रक्त वाहिका फट जाती है या लीक हो जाती है। रक्तस्राव से मस्तिष्क के ऊतकों पर दबाव पड़ता है और ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होती है। इस स्ट्रोक के 15 फीसदी मरीज होते हैं।

कारण

- उच्च रक्तचाप

- मधुमेह

- हृदय रोग

- धूम्रपान

- शराब का सेवन

-अधिक वजन

- तनाव

- नींद की कमी

- अनियमित जीवनशैली

लक्षण

शरीर के एक हिस्से में कमजोरी

- बोलने में दिक्कत

- देखने में दिक्कत

- चलने में दिक्कत

- सिरदर्द या मतली

बचाव

- तनाव प्रबंधन
- स्वस्थ आहार
- नियमित व्यायाम
- नियमित स्वास्थ्य जांच
- नींद की अच्छी आदतें
- धूम्रपान व शराब का सेवन बंद करें

- उच्च रक्तचाप व मधुमेह नियंत्रित करें

महत्वपूर्ण बातें

- युवाओं में स्ट्रोक की दर बढ़ रही है।

- स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

- स्ट्रोक से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।

- नियमित स्वास्थ्य जांच से स्ट्रोक की दर कम हो सकती है।

स्ट्रोक मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण

विश्व स्ट्रोक दिवस के एक दिन पूर्व मंगलवार को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें न्यूरोलोजी विभाग के प्रमुख प्रो.डॉ. राजेश वर्मा ने बताया रोकथाम के लिए सबसे शक्तिशाली उपाय रक्तचाप को नियंत्रित रखना, तंबाकू से दूर रहना, स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित व्यायाम करना और लक्षणों को पहचान कर समय पर इलाज सुनिश्चित कराना जीवन बचा सकता है।

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डॉ. स्नेहांश ने प्रस्तुत स्लाइड शो में स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण और उपचार की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। जिसके बाद केजीएमयू में उपचार ले चुके रोगियों के प्रेरक वीडियो दिखाए गए। कार्यक्रम में डॉ. इमरान रिजवी, डॉ. राजर्षि चक्रवर्ती, डॉ. अनदी प्रकाश मिश्रा, डॉ. अर्जुन, डॉ. तेजवीर सिंह, डॉ. नलिनी रस्तोगी, डॉ. डॉ. श्रावणिका और डॉ. सरितेश ने भी जानकारी साझा की।

स्ट्रोक आज भी एक बड़ी जनस्वास्थ्य चुनौती है। नवीनतम वैश्चिक ऑकड़ों के अनुसार स्ट्रोक मृत्यु का दूसरा और मृत्यु तथा विकलांगता का तीसरा प्रमुख कारण है। वर्ष 2021 में लगभग 1.19 करोड़ नए मामले आए। जिसमें करीब 70 लाख मौतें दर्ज की गई। इससे विश्व अर्थव्यवस्था पर प्रतिवर्ष लगभग 890 अरब अमेरिकी डॉलर का बोझ पड़ता है।

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