Bareilly: CARI में तैयार एग ड्रिंक देगा एनर्जी और प्रोटीन शेक को टक्कर...देश में पहली बार बनी ये तकनीक

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीवीआरआई) के वैज्ञानिकों ने अंडे पर आधारित पौष्टिक पेय विकसित किया है। यह शोध देश में पहली बार विकसित की गई ऐसी तकनीक है, जिसमें अंडे के संपूर्ण पोषण को एक पेय के रूप में प्रस्तुत किया गया है। केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के स्थापना दिवस पर इस तकनीक को आईसीएआर के उप महानिदेशक कृषि प्रसार डॉ. राजवीर सिंह औपचारिक रूप से रिलीज करेंगे।

संस्थान के वैज्ञानिकों ने इस एग-बेस्ड ड्रिंक को दो रूपों में विकसित किया है। होल एग ड्रिंक (जिसमें पूरा अंडा शामिल है) और एग एल्बुमेन ड्रिंक (जिसमें केवल अंडे का सफेद भाग उपयोग किया गया है)। दोनों पेयों की रासायनिक व पोषणीय संरचना का विश्लेषण किया गया, जिसमें पाया गया कि होल एग ड्रिंक में प्रोटीन (8.9 ग्राम/100 मिली), वसा (5.51 ग्राम/100 मिली) और कोलेस्ट्रॉल (186 मि.ग्रा./100 मिली) की मात्रा अधिक थी, जबकि एल्बुमेन ड्रिंक में नमी 84 प्रतिशत और खनिजों का संतुलन बेहतर पाया गया।

संस्थान के डॉ. आदगांवकर आदित्य बालासाहेब, डॉ. जयदीप जे. रोकड़े (सीनियर साइंटिस्ट इंचार्ज, पीएचटी, सीएआरआई ( इज्जतनगर), डॉ. आशीम कुमार विश्वास (प्रधान वैज्ञानिक, एलपीटी डिवीजन, आईसीएआर-आईवीआरआई), डॉ. गौरी जैराथ (वैज्ञानिक, एलपीटी, आईसीएआर) और डॉ. नागेश सोनाले की टीम ने यह नवीन एग-बेस्ड ड्रिंक तैयार की है। शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पेय के स्वाद को आकर्षक बनाने के लिए तीन फ्लेवर कोको पाउडर, इलायची और ठंडाई को शामिल किया।

 प्रशिक्षित पैनल के सेंसररी विश्लेषण में कोको पाउडर फ्लेवर को सर्वश्रेष्ठ माना गया। इसका रंग, स्वाद, मिठास और स्वीकार्यता के आधार पर उपभोक्ता पसंद में यह सर्वोच्च रहा। परिणामस्वरूप, कोको फ्लेवर को अंतिम उत्पाद के रूप में चुना गया। यह उत्पाद 4±1°C तापमान पर भंडारण के दौरान स्थिर पाया गया, जिससे इसकी शेल्फ लाइफ में भी सुधार हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह ड्रिंक बाजार में उपलब्ध एनर्जी और प्रोटीन पेयों का सशक्त विकल्प बन सकती है, खासकर बच्चों, खिलाड़ियों और स्वास्थ्य के प्रति सजग लोगों के लिए।

सीएआरआई के कार्यकारी निदेशक डॉ जगबीर सिंह त्यागी का कहना है कि इस तकनीक से न केवल अंडे के उपभोग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पोल्ट्री उद्योग को भी नए व्यावसायिक अवसर मिलेंगे। तकनीक के हस्तांतरण के बाद उद्योग इकाइयों की ओर से इस पेय को बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए अपनाया जा सकेगा।

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