यूपी एनसीआर में डीजल ऑटो रिक्शा पर होगी पाबंदी, वायु प्रदूषण पर सख्त एक्शन प्लान तैयार

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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प्रमुख सचिव बने नोडल अधिकारी, बनाई गई निगरानी इकाई

लखनऊ, अमृत विचार: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के यूपी वाले हिस्से में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए योगी सरकार ने व्यापक, सख्त और बहुस्तरीय एक्शन प्लान तैयार किया है। मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में बनी उच्च स्तरीय समिति ने सड़क की धूल को प्रदूषण का मुख्य कारण मानते हुए सड़क पुनर्विकास, धूल नियंत्रण और सफाई को शीर्ष प्राथमिकता में रखा है।

प्रदेश सरकार ने कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव को नोडल अधिकारी नामित किया है। इसके साथ ही राज्य स्तर पर परियोजना निगरानी इकाई (पीएमयू) बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता विभाग के सचिव करेंगे। इस इकाई में शहरी विकास, लोक निर्माण, आवास व शहरी नियोजन, और औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, ताकि विभिन्न एजेंसियों के बीच सुचारू समन्वय हो सके और कार्रवाई में तेजी आए।

प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार ने डीजल ऑटो रिक्शा पर चरणबद्ध रोक लगाने का निर्णय लिया है। गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में डीजल ऑटो का संचालन पूरी तरह बंद किया जाएगा। बागपत में 31 दिसंबर 2025 तक डीजल ऑटो पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। मेरठ क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण ने प्रतिबंधित वाहनों के नए परमिट और परमिट नवीनीकरण पर रोक लगा दी है। 31 दिसंबर 2026 तक मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर और शामली में ऑटो रिक्शा संचालन को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा।

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने स्पष्ट कहा है कि सभी विभागों को समन्वित कार्रवाई, साप्ताहिक समीक्षा, और फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कार्य करना होगा। सरकार का लक्ष्य एनसीआर-यूपी में वायु गुणवत्ता को सुरक्षित स्तर पर लाना और आम नागरिकों को प्रदूषण के दुष्प्रभावों से राहत देना है।

धूल कम करने के लिए एंटी–स्मॉग गन और स्प्रिंकलर

नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को सड़क की धूल कम करने के लिए एंटी–स्मॉग गन, स्प्रिंकलर, यांत्रिक सफाई मशीनें और धूल नियंत्रण से जुड़ी अन्य तकनीकें बड़े पैमाने पर लगाने का निर्देश दिया गया है। यह पहल उन नगरों में बेहद अहम मानी जा रही है जहां निर्माण गतिविधियों और वाहनों के दबाव के कारण वायु गुणवत्ता तेजी से बिगड़ती है। सरकार के इस कदम से लाखों लोगों को प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद है।

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