मेरा शहर मेरी प्रेरणा : ...बरेली यू नहीं बना मेडिकल हब
बरेली की सरजमीं पर मरीजों को संजीवनी देने के लिए रखी गई थी मिशन अस्पताल की नींव
मैं बरेली हूं, रोहिलखंड का गौरवशाली शहर। मैंने अपने भीतर चिकित्सा सुविधाओं के क्षेत्र में एक शांत, लेकिन क्रांतिकारी परिवर्तन देखा है। यह बदलाव इतना गहरा है कि मुझे अब अपने निवासियों को इलाज के लिए लखनऊ या दिल्ली की लंबी यात्राएं करते हुए देखना नहीं पड़ता, बल्कि इसके विपरीत, अब मैं गर्व से देखता हूँ कि पड़ोसी जिलों और अन्य राज्यों से भी लोग यहाँ आकर अपना इलाज करा रहे हैं।
मेरी चिकित्सा यात्रा की शुरुआत 1870 के दशक में हुई, जब अमेरिकी मेडिकल मिशनरी डॉ. क्लारा स्वैन ने यहां कदम रखा। उस समय, मैं चिकित्सा सुविधाओं से लगभग अछूता था, खासकर महिलाओं के लिए। डॉ. स्वाइन ने जो किया वह एक चमत्कार से कम नहीं था - उन्होंने एशिया का पहला महिला अस्पताल स्थापित किया। नई पीढ़ी को बताना चाहता हूं कि यहां का उपचार केवल दवाइयों तक सीमित नहीं था, इसमें सेवा और करुणा की भावना थी। यह उत्तरी भारत में नर्सिंग शिक्षा का एक प्रमुख संस्थान भी बना। क्लारा स्वाइन अस्पताल ने उस नींव को रखा जिस पर आज की आधुनिक इमारत खड़ी है।
आज़ादी के बाद और 21वीं सदी की शुरुआत तक, मेरी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली मुख्य रूप से सरकारी जिला अस्पतालों पर निर्भर थी, जिनमें अक्सर संसाधनों की कमी होती थी। यही कारण था कि मेरे निवासी, जो थोड़ा भी खर्च कर सकते थे, गंभीर बीमारियों के लिए लखनऊ के पीजीआई या दिल्ली के एम्स की ओर रुख करते थे। यह मेरे लिए निराशाजनक था। फिर बदलाव की बयार आई। निजी क्षेत्र ने इस खालीपन को भरा और स्वास्थ्य सेवा के मेरे परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया। रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज, श्री राम मूर्ति स्मारक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और राजश्री मेडिकल कॉलेजों जैसे संस्थानों ने मुझे एक नया रूप दिया। ये सिर्फ अस्पताल नहीं... अत्याधुनिक उपकरणों, समर्पित आघात इकाइयों, और सुपर-स्पेशियलिटी विभागों के साथ पूर्ण चिकित्सा केंद्र हैं। अब जटिल ऑपरेशन, एमआरआई, सीटी स्कैन और कैथ लैब जैसी सुविधाएं मेरे अपने आंगन में उपलब्ध हैं। इलाज के लिए मेरे लोगों को अब बाहर जाने की ज़रूरत महसूस नहीं होती थी।
आज, मैं बरेली हूं, एक ऐसा शहर जो अपनी चिकित्सा क्षमताओं पर गर्व करता है। मैं एक मेडिकल एजूकेशन हब बन गया हूं। अब यहां न केवल स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं हैं, बल्कि यहां से पढ़कर डॉक्टर गांव देहात से लेकर बड़े शहरों तक बेहतर इलाज उपलब्ध करा रहे हैं। मेडिकल जांच के लिए मुंबई और दिल्ली जितनी सुविधाएं भी मेरे यहां है। ये प्रगति रुकी नहीं है, धीरे धीरे और मेडिकल कॉलेज बनेंगे और विश्वस्तरीय सुविधाएं भी स्थापित होंगी। मैं विकसित हुआ हूं, मैंने बदलाव अपनाया है, और मैं अपने निवासियों के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल करने के लिए तैयार हूं।
बरेली शहर की पहचान आध्यात्मिकता और शिक्षा से बनती है, तो चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में इस पहचान को सबसे मजबूत आधार देने वाला नाम है, बरेली का क्लारा स्वैन मिशन अस्पताल। करीब 140 वर्ष का इतिहास संजोए ये अस्पताल करुणा, निष्ठा और मानवता का वास्तविक परिचायक तो बना ही लेकिन अन्य के अंदर भी बरेली को चिकित्सा क्षेत्र में नया आयाम स्थापित करने के लिए किसी प्रेरणा से कम साबित नहीं हुआ। इसका ही परिणाम है कि अब बरेली जिला 100 नहीं बल्कि तीन मेडिकल कॉलेजों के साथ ही अत्याधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण 625 निजी अस्पतालों का हब बन गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पहले जहां सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने पर मरीजों को खुद उनके तीमारदार ही जीवन की डोर टूटने जैसी बातें करने लगते थे लेकिन अब सरकारी अस्पतालों की तस्वीर भी साफ हो रही है। जिसका परिणाम है कि जिले में 100 बेड का जिला महिला अस्पताल, 326 बेड का जिला अस्पताल और देहात के सभी 15 ब्लॉक पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ ही गांव के निकट ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी स्थापित हैं।
इलाज ही नहीं निदान से भी है पहचान : गौर करने वाली बात ये है कि जिले में सिर्फ अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज से संजीवनी मिलने का विषय नहीं है बल्कि इलाज से पूर्व उपयोगी साबित होने वाली इलाज पूर्व निदान के लिए भी बरेली किसी मायने में कम नहीं हैं। यहां 300 से अधिक पैथोलॉजी लैब, 682 अल्ट्रासाउंड जांच सेंटर और दस से अधिक सीटी व एमआरआई जांच सेंटर हैं। जहां रोजाना सैंकड़ों मरीज समय पर जांच कराकर उचित इलाज से नई जिंदगी जी रहे हैं।
शहर की दौड़ खत्म, घर के पास ही गूंज रही किलकारी
पांच साल पहले तक देहात क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के हाल बेहाल थे, डॉक्टरों की कमी व संसाधन न होने पर लोगों को आर्थिक हानि का सामना करते हुए निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा था, लेकिन अब स्थिति बदल गई। नवाबगंज, बिथरी, मीरगंज, भमौरा समेत अन्य सीएचसी पर इस साल से ही प्रसव शुरू हो गए है।
नशे की लत से मुक्ति दिला रहा ओएसटी : जिले में अभी तंबाकू, शराब व दवाओं से नशा करने वाले मरीजों के लिए निजी व एनजीओ के माध्यम से संचालित नशा मुक्ति केंद्र ही सहारा बन रहे थे लेकिन अब जिला अस्पताल में ही इंजेक्टेबल ड्रग यूजर्स यानि इंजेक्शन से नशा करने वाले मरीजों का इलाज के लिए ओएसटी केंद्र की स्थापना हो गई है।
