परदादा ने जेल में कैदियों की सेवा की प्रपौत्र सेना के जवानों को रख रहा स्वस्थ

Amrit Vichar Network
Edited By Pradeep Kumar
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बरेली के स्वास्थ्य जगत में धर्मदत्त वैध एक सम्मानित नाम हैं। अंग्रेजों के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जेल में रहकर उन्होंने कैदियों की सेवा की और रिहाई के बाद जीवन पर्यंत लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल को अपना ध्येय बनाया। आज उन्हीं की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनके पोते डॉ. अनुपम शर्मा पत्नी डॉ. मृदुला शर्मा और प्रपौत्र डॉ. राघव शर्मा–पत्नी डॉ. निकिता, जो भारतीय सेना में हैं, उत्तम चिकित्सीय सेवा में समर्पित हैं। 1937 में भिवाड़ी (हरियाणा) से आयुर्वेदाचार्य की शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने बरेली के बड़ा बाज़ार, मदारी गेट पर तिलक फार्मेसी की स्थापना की। यहां वे स्वयं आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण कर मरीजों का उपचार करते थे। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गिरफ्तारी के बाद चार साल की जेल हुई। जेल में कैदियों को साधारण इलाज भी न मिलता देख उन्होंने जेलर से अनुमति लेकर परिसर में जड़ी-बूटियां उगाईं और उनसे तैयार दवाओं से कैदियों का इलाज शुरू किया-यह सेवा पूरे चार वर्षों तक जारी रही। रिहा होने के बाद वे पुनः तिलक फार्मेसी में बैठकर लोगों की सेवा करते रहे।1953 में उन्होंने धर्मदत्त आयुर्वेदिक चिकित्सालय की स्थापना की। 1989 में उन्होंने सेवाभाव से भरा जीवन पूर्ण किया। उनकी शुरू की गई संस्था आज भी बरेली आयुर्वेद कॉलेज के सहयोग से समाज को सेवा दे रही है।

प्रपौत्र लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. राघव शर्मा   पत्नी के साथ कर रहे जवानों का इलाज : परदादा और पिता की प्रेरणा से लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) राघव शर्मा ने भी चिकित्सा को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना। राममूर्ति कॉलेज बरेली से एमबीबीएस और देश के अग्रिणी मेडिकल कॉलेज एएफएमसी,पुणे से एमडी करने के बाद वे असम स्थित गुवाहाटी आर्मी हॉस्पिटल में सैनिकों की सेवा में जुटे हैं। उनकी पत्नी लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ) निकिता, जिन्होंने उनके साथ ही एमबीबीएस और एमडी किया, वही सेना के कर्मियों की चिकित्सा सेवा में समान रूप से योगदान दे रही हैं।

पोते डॉ. अनुपम शर्मा - धर्मदत्त वैध की सेवा परंपरा का आधुनिक रूप : 1980 में एमबीबीएस और 1990 में एमडी करने के बाद डॉ. अनुपम शर्मा ने दिल्ली के सफदरजंग, राममनोहर लोहिया जैसे प्रतिष्ठित अस्पतालों में सेवा दी। एक वर्ष तक भारत सरकार के विशेष अनुबंध पर ईरान में कार्य किया। 1998 में उन्होंने बरेली में दादा व पिता भूपेंद्र नाथ शर्मा  जो मीरगंज से विधायक रहे से प्रेरित हो धर्मदत्त सिटी हॉस्पिटल की स्थापना कर स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी। आज यह अस्पताल गुणवत्तापूर्ण इलाज के लिए जाना जाता है। वे वर्तमान में एपीआई (एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया) 2025, बरेली के अध्यक्ष हैं। उनकी पत्नी डॉ. मृदुला शर्मा, दिल्ली से प्रशिक्षित स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, 2024 में फोगसी बरेली ब्रांच की अध्यक्ष रहीं। दोनों के 20 से अधिक शोधपत्र   प्रकाशित हो चुके हैं और देश-विदेश के मेडिकल कांफ्रेंस में व्याख्यान दे चुके हैं। दोनों शिक्षा जगत में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं, ब्रह्मा देवी इंटर कॉलेज, मीरगंज सहित चार शिक्षण संस्थानों का संचालन देख रहें हैं।

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