मेरा शहर मेरी प्रेरणा : कोरोना हुआ भयावह तो डॉ. सुबोध बने ढाल
बीसवीं शताब्दी की सबसे भयावह बीमारी कोरोना ने जब पैर पसारना शुरू किया तो बड़े- बड़े लोगों की हिम्मत जवाब दे गईं। लोग घरों में कैद हो गए, वाहन थम गए। ऐसे में कुछ ऐसे कोरोना योद्धा ने मिसाल पेश की जो अन्य के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं।
इस लिस्ट में एक नाम है डॉ. सुबोध शर्मा का जिन्होंने कोविड काल में रामपुर के सीएमओ की जिम्मेदारी निभाते हुए लोगों को भयानक बीमारी से मुक्त करने के लिए अपनी टीम के साथ दिन- रात मेहनत की। डॉ. सुबोध शर्मा ने एमबीबीएस और एमडी की डिग्री पूरी करने के बाद बतौर डॉक्टर लोगों की जो सेवा देनी शुरू की, वह 30 अप्रैल 2025 तक जारी रही है।
प्रदेश में चमका महिला अस्पताल, जिला अस्पताल की बदली तस्वीर : कहते हैं न कि जोड़ी भगवान बनाते हैं ऐसे ही डॉक्टर दंपति है डॉ. सुबोध और डॉ. अलका शर्मा जिन्हें सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में उत्कृष्ट योगदान के लिए जाना जाता है। डॉ. अलका शर्मा ने सेवाओं में रहते हुए लोगों को रोगमुक्त बनाने का काम किया। सरकारी सेवाओं में आने के बाद उन्होने सीएचसी बहेड़ी में बतौर एलएमओ सेवाएं आरंभ कीं।
2016 में शासन ने उन्हें बरेली के जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका की जिम्मेदारी दी। बस फिर क्या था, अस्पताल की धुंधली तस्वीर को साफ करने में जुट गई। मेहनत रंग लाई और महिला अस्पताल को नेशनल क्वलिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड प्रमाणित कर प्रदेश में अस्पताल की पहचान बनाई। वर्ष 2022 में वह जिला अस्पताल बरेली की अपर निदेशक एवं प्रमुख अधीक्षक बनीं, यहां नई सड़कों का निर्माण, ऑक्सीजन प्लांट, मरीजों को दिया जाने वाले भोजन प्रणाली में सुधार के साथ कई उत्कृष्ट कार्य उनकी पहचान बनें।
