Bareilly: दाड़ी और कुर्ता पैजामा में मिला हत्या का आरोपी प्रदीप...36 साल तक अब्दुल रहीम बनकर जेल से रहा फरार

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। पैरोल पर जेल से छूटकर आया हत्या का आरोपी 36 साल तक पुलिस के हाथ नहीं लगा। परेशान होकर पुलिस ने भी हार मान ली। मगर जब हाईकोर्ट ने सख्ती बरती और फरार बंदी को अदालत में पेश करने का आदेश दिया तब पुलिस ने दोबारा उसकी तलाश शुरू की। आखिरकार 36 साल बाद बंदी जब हाथ आया तो पुलिस भी हैरान थी। जेल से पैरोल पर छूटने के बाद फरार तो प्रदीप कुमार सक्सेना हुआ था, मगर गिरफ्तार किया गया अब्दुल रहीम को। जिसके सर पर टोपी थी और किसी पांच वक्त के नमाजी की तरह चेहरे पर दाड़ी। अब आप कहेंगे कि माजरा क्या है? जब फरार प्रदीप कुमार सक्सेना हुआ तो पुलिस अब्दुल रहीम को क्यों पकड़ लाई। दरअसल इसी सवाल से शुरू होती है प्रदीप कुमार सक्सेना के 36 साल तक पुलिस की गिरफ्त से दूर रहने की दास्तां। 

साल 1987 यानी अबसे तकरीबन 38 साल पहले थाना शाही क्षेत्र के रहने वाले प्रदीप कुमार सक्सेना को हत्या के आरोप में जेल भेजा गया। जेल में करीब 2 साल गुजारने के बाद साल 1989 में प्रदीप पैरोल के लिए आवेदन करता है।  इस पैरोल के बहाने उसका मकसद जेल की चहारदीवारी से भागना था। उसकी पैरोल मंजूर हुई और जेल से बाहर आ गया। लेकिन फिर कभी जेल के अंदर नहीं गया। पुलिस प्रदीप कुमार सक्सेना की तलाश में 36 साल तक खाक छानती रही। मगर प्रदीप का कोई सुराग नहीं लगा। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट गया तो कोर्ट ने आदेश दिया कि 4 सप्ताह के अंदर प्रदीप को गिरफ्तार कर सीजेएम बरेली की कोर्ट में पेश किया जाए। कोर्ट की इस सख्ती के बाद पुलिस दोबारा हरकत में आई और कड़ी से कड़ी जोड़ना शुरू कर दिया गया। उसके परिवार वालों से लेकर परिचितों तक से पूछताछ हुई मगर सबने यही कहा कि सालों से उसे किसी ने नहीं देखा।

साहूकारा किला थाना क्षेत्र के रहने वाले प्रदीप के भाई सुरेश से पुलिस को अहम सुराग मिला। सुरेश ने बताया कि भाई को सालों से नहीं देखा मगर इतना  जानते हैं कि मुरादाबाद में रहकर वो ड्राइवर का काम करता है। भाई सुरेश की जानकारी पुलिस के काम आई। शाही पुलिस मुरादाबाद के करूला थाने पहुंची तो लोगों से पूछताछ से बड़ा खुलासा हुआ। यहां प्रदीप अब्दुल रहीम उर्फ सक्सेना ड्राइवर के नाम मशहूर है। लोगों ने बताया कि करीब 30 साल से वो यहीं गाड़ी चला रहा है। ट्रांसपोर्टनगर मुरादाबाद में पता चला कि अब्दुल रहीम उर्फ सक्सेना ड्राइवर किसी काम की बात कहकर बरेली के लिए निकला है। फिर क्या था शाही पुलिस ने बरेली का रुख किया और डेलापीर मंडी से अब्दुल रहीम उर्फ सक्सेना ड्राइवर यानी प्रदीप को पकड़ लिया। 

प्रदीप सक्सेना के चेहरे पर लंबी दाड़ी और शरीर पर कुर्ता पैजामा देखकर पुलिस भी हैरान थी। उसने हुलिया भी इस तरह बदला था कि आसानी से पहचाना मुश्किल था। प्रदीप ने पुलिस को बताया कि 1987 में पैरोल पर छूटकर आने के बाद वह फरार हो गया था। कोर्ट की कार्रवाई से बचने के लिए वह पहचान बदलकर रहने लगा। पहचान छिपाने के लिए मजहब की आड़ ली और साल 2003 में अपना धर्म बदलकर प्रदीप कुमार सक्सेना से अब्दुल रहीम बनकर मुरादाबाद में ड्राइवरी करने लगा। जब फरार हुआ था तब उसकी उम्र 40 साल थी आज वो 70 साल का हो चुका है। फिलहाल प्रदीप के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली है।

 

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