बाराबंकी: सारी दुनिया को चलो प्यार से जोड़ा जाए… कवि सम्मेलन में गूंजी तालियों की गड़गड़ाहट
देवा/बाराबंकी, अमृत विचार। पींड गांव में चल रहे तीन दिवसीय धनुष यज्ञ मेले में बुधवार की रात आयोजित कवि सम्मेलन ने माहौल को पूरी तरह साहित्यिक और भावपूर्ण बना दिया। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध किए रखा। उनकी प्रस्तुतियों पर बार-बार तालियों की गूंज गूंजती रही।
कार्यक्रम की शुरुआत रामनगर, बाराबंकी के हास्य कवि विकास बौखल ने अपनी पंक्तियों किसी खंजर से न तलवार से जोड़ा जाए, सारी दुनिया को चलो प्यार से जोड़ा जाए…से की, जिसने श्रोताओं के बीच उत्साह जगा दिया। इसके बाद रायबरेली के कवि नीरज पांडेय ने सामाजिक संवेदनाओं से भरी रचना “तू जिसकी मुश्किलें आसान करने में लगा है, वही बंदा तेरा नुकसान करने में लगा है…सुनाकर खूब सराहना पाई।
बाराबंकी के कवि अजय प्रधान ने कविता की अंतरात्मा को छूने वाली पंक्तियां कवि अंतर्मन में रोता है तब बनती है कविता… प्रस्तुत कीं। कवि शिवेश राजा ने सामाजिक परिस्थितियों पर आधारित प्रभावशाली रचना पढ़ी कोहसा झूठ का जब सत्य को ढकने लगेगा…तब तब कवि तलवार से कविता लिखेंगे। देशभक्ति की भावनाओं को कवि सूर्यांशु सूर्य ने अपनी पंक्तियों देश प्रेम क्या होता है मैं तुम्हें बताने आया हूं…से उत्तेजित किया। कवि रवि रुद्रांश ने प्रकृति के सौंदर्य और जीवन के आशावाद को समेटती रचना पेश की कहो पंछियों से चहकना न छोड़ें…।
अंत में कवि शिवकुमार ब्यास ने समसामयिक व्यंग्य से भरी पंक्तियाँ “गुंडा तस्कर और माफिया कांप रहे हैं थर-थर सुधारो नहीं तो आ जाएगा बाबा जी का बुलडोज़र।” सुनाकर कार्यक्रम को चरम पर पहुंचा दिया। कवि सम्मेलन देर रात तक तालियों और वाहवाही के बीच चलता रहा। इस मौके पर मेला प्रबंधक राम लखन मिश्रा, शिवम सिंह, सुनील लोधी, सत्यम सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।
