ग्रामीण मेलों को भव्य बनाएगा ''बजट''..., नगर की तरह ग्राम पंचायतों को बजट देने की तैयारी
पंचायती राज निदेशालय ने मांगी मेलों की रिपोर्ट
लखनऊ, अमृत विचार : ग्रामीण इलाकों में आयोजित होने वाले मेलों का ग्राम पंचायतों को बजट देने की तैयारी है, ताकि आयोजनों और भव्य तरीके से मनाया जा सके। पंचायती राज निदेशालय ने प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों से ऐसे 50 हजार से अधिक लोगों के शामिल होने वाले पारंपरिक मेलों की रिपोर्ट मांगी है, जो शासन को भेजी जाएगी।
ग्राम पंचायतों में गंगा स्नान मेला, महाशिवरात्रि एवं श्रावण मास मेला, जन्माष्टमी मेला, दशहरा मेला समेत अन्य पारंपरिक मेले आयोजित होते हैं। इनके लिए ग्राम पंचायतों के पास बजट नहीं होता। न ही वित्तीय संसाधन जुटा पाते हैं। वर्षों से चंदा व अन्य स्रोत से आयोजन होते आ रहे हैं। इन मेलों के लिए कोई बजट व प्राविधान नहीं है। जबकि नगर के नियम हैं और बजट की व्यवस्था है। ठीक नगर की तरह ग्राम पंचायतों में मेला के लिए बजट और नियम सरकार बना रही है। ताकि चंदा न करके बजट से पारंपरिक आयोजन भव्य तरीके से कराए जा सकें।
इन बिंदुओं पर बनेंगे नियम व तय होगा बजट
- मेला में शामिल होने वालों की अनुमानित संख्या
- स्थल का क्षेत्रफल व जल स्रोत
- स्थाई व अस्थाई वाहन की व्यवस्था
- पूर्व से आयोजन के वित्तीय संसाधन
- जिले में लगने वाले मेलों की कुल संख्या
