UP: पीटीआर में वन्यजीवों की प्यास बुझाने को शुरू हुईं तैयारियां, बनेंगे पांच सोलर पंप बेस्ड वाटर होल 

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत, अमृत विचार। बढ़ते तापमान और आगामी भीषण गर्मी की चुनौतियों को देखते हुए टाइगर रिजर्व प्रशासन ने वन्यजीवों को पेयजल संकट से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं। इसको लेकर रेंजों में वन्यजीवों के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नए सत्र में पांच नए सोलर पंप बेस्ड वाटर होल तैयार किए जा रहे हैं। इन नए वाटर होल के निर्माण के साथ ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व में अब इनकी संख्या बढ़कर 60 हो जाएगी, जिससे जंगल में रहने वाले वन्यजीवों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व 73 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ है। वैसे तो जैव विविधता से भरपूर इस संरक्षित जंगल से तमाम नदी नाले और वैटलैंड भी हैं। मगर, गर्मी के सीजन को देखते हुए वन अफसरों को वन्यजीवों को पीने का पानी उपलब्ध कराने की चिंता सताने लगी हैं। 

टाइगर रिजर्व के आंकड़ों के मुताबिक पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सभी पांच रेंजों में 55 से अधिक वाटर होल है। इसमें करीब 26 जलाशय एवं वॉटर होल ऐसे थे, जिनमें सोलर पंप के माध्यम से पानी भरा जाता थ। इसके अलावा शेष अन्य प्राकृतिक जलस्रोत पर आधारित हैं, इनमें पानी की मात्रा कम होने पर टैंकरों के माध्यम से पानी भरा जा रहा था।

बीते वर्ष पीलीभीत टाइगर रिजर्व के साथ एमओयू साइन करने वाली एमथ्रीएम फाउंडेशन ने टाइगर रिजर्व को तीन सोलर पंप उपलब्ध कराए थे। ऐसे में टाइगर रिजर्व में सोलर पंप से रिचार्ज होने वाले जलाशयों एवं वाटर होल की संख्या बढ़कर 29 हो थी। इधर टाइगर रिजर्व प्रशासन ने नए सत्र में 05 और वाटर होल बनाने का निर्णय लिया है। 

टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से 01-01 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इन वाटर होल के लिए उपयुक्त जगह चिन्हित करते हुए इनका निर्माण भी शुरू करा दिया गया है। यह सभी सोलर पंपों द्वारा संचालित किए जाएंगें। इनके निर्माण के बाद पीलीभीत टाइगर रिजर्व में वाटर होल की संख्या बढ़कर 60 हो जाएगी। इससे बाघ, हिरण समेत अन्य वन्यजीवों को पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों या जंगल से बाहर भटकना नहीं पड़ेगा।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि समय से पहले बढ़ी गर्मी को देखते हुए वन्यजीवों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है। संरक्षित क्षेत्रों को प्राकृतवास एवं वन्यजीव प्रबंधन योजना के अंतर्गत 05 नए वाटर होल का निर्माण शुरू कराया गया है। जल्द ही इनका निर्माण भी पूरा कर लिया जाएगा।

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