प्रदेश में दूर होगी पशु चिकित्साधिकारियों की कमी, पहले चरण में 404 व दूसरे में करीब 150 पदों का भेजा गया अधियाचन

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
On

प्रशांत सक्सेना/ लखनऊ, अमृत विचार : राजकीय पशु चिकित्सालयों में लंबे समय से चली आ रही चिकित्सकों की कमी दूर होगी। सरकार द्वारा श्रेणी-2 के पशु चिकित्साधिकारी रखे जाएंगे। पशुपालन विभाग ने पहले चरण में 404 व दूसरे करीब 150 पशु चिकित्साधिकारी रखने का अधियाचन आयोग को भेजा है। हालांकि भर्ती में ओबीसी के पद सृजित न होने को लेकर सवाल भी उठे हैं। इसके समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रदेश में कुल 1984 पशु चिकित्साधिकारी पद के सापेक्ष करीब 600 की कमी है। चयन की प्रक्रिया पांच साल से अधिक समय से नहीं हुई है। इस बीच तमाम पशु चिकित्साधिकारी प्रोन्नत होकर डिप्टी बन गए या फिर सेवानिवृत्त हो गए। इस वजह से पशु चिकित्साधिकारियों की भारी कमी हो गई।

कई खाली पड़े चिकित्सालय आसपास के चिकित्सकों को प्रभार के तौर पर दिए गए। जोकि एक समय पर एक चिकित्सालय में बैठ पाते हैं और दूसरे की सेवाएं प्रभावित होती हैं। पशुपलाकों को भी पशुओं के उपचार के लिए भटकना पड़ता है। फिर भी संसाधन, चिकित्सक और स्टॉफ की कमी से जूझ रहा विभाग क्षेत्र में घायल व गंभीर पशुओं की सूचना मिलने पर त्वरित सेवा देता है। निदेशक प्रशासन एवं विकास डॉ. मेमपाल सिंह ने बताया कि चिकित्सकों की भर्ती से सेवाएं और बेहतर होंगी। इसका पशुपालकों को लाभ मिलेगा।

चालू नहीं हो पाए करोड़ों से बने अस्पताल व लैब

प्रदेश में पहले छह पॉलीक्लीनिक और बाद में 20 और बने। एक के निर्माण पर नौ करोड़ रुपये खर्च हुआ। इसी तरह जिलास्तरीय 65 प्रयोगशालाएं बनीं। एक के निर्माण पर औसतन 7.50 करोड़ रुपये खर्च हुआ। लेकिन, संचालन नहीं हो पाए। इस वजह से सेवाएं हाईटेक नहीं हो सकीं। इनके संचालन की विभाग रूपरेखा तैयार कर रहा है। इसके अतिरिक्त पुराने जर्जर चिकित्सालयों की मरम्मत कराकर विकसित किए जाएंगे। शासन ने सभी सीवीओ से रिपोर्ट मांगी है।

एक नजर में चिकित्सालयों की स्थिति

कुल चिकित्सालय - 2214
पशुधन प्रसार अधिकारी केंद्र - 2574
औषधालय - 267

कानपुर में तेजी से फैला पशुओं की मदद का धंधा

लखनऊ के बाद कानपुर में पशुओं का उपचार और उनके संरक्षण के नाम वसूली करने वाले कथित एनजीओ और उनके दलाल तेजी से बढ़ रहे हैं। गली-गली काम करने वाले सक्रिय लोग, जो लोगों से पैसा मांगने के साथ निराश्रित और निजी पशुओं का घरों पर इलाज करके वसूली करते हैं। गलियों में ओटी बनाकर ऑपरेशन करते हैं। केस बिगड़ने पर सरकारी चिकित्सकों के पास भेजते हैं। इनकी बढ़ती संख्या और झाेलाछाप इलाज से चिकित्सक परेशान हैं। शासन ने इसका भी संज्ञान लिया है। 

ये भी पढ़े : 
यूपी सीएम से मिली KGMU लव जेहाद पीड़ता, योगी ने दिया इंसाफ का आश्वासन 

 

संबंधित समाचार