चांद के सफर में आपका नाम
20 जुलाई, 1969 को अपोलो 11 की चांद पर लैंडिंग और नील आर्मस्ट्रांग का ‘एक छोटा कदम’ वाला डायलॉग, अभी भी रोंगटे खड़े कर देता है। भारत के चंद्रयान-3 ने 2023 में सॉफ्ट लैंडिंग करके साबित कर दिया कि हम भी इस रेस में हैं और अब 2026 आते-आते नासा का आर्टेमिस मिशन चांद पर वापसी की तैयारी कर चुका है। आर्टेमिस द्वितीय ने क्रूड ऑरबिट टेस्ट किया और आर्टेमिस तृतीय का लैंडिंग मिशन बस कोने पर है। चांद को छूने की हसरत हर किसी की होती है। पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चांद, जिसका गुरुत्वाकर्षण समुद्र की लहरों को नियंत्रित करता है और जिसकी सतह पर पानी की खोज ने अंतरिक्ष अन्वेषण को नई दिशा दी है, पर आप भी अपना नाम भेजकर ऐतिहासिक पलों का हिस्सा बन सकते हैं। चंद्रमा पर अपना नाम भेजने का रोमांच तो वाकई अनोखा है। - डॉ. इरफ़ान ह्यूमन, एसोसिएट प्रोफ़ेसर/विज्ञान लेखक
आर्टेमिस-द्वितीय मिशन
नासा की “अपना नाम चंद्रमा पर भेजो” पहल के तहत आर्टेमिस-द्वितीय मिशन के साथ आपका नाम ओरियन अंतरिक्ष यान पर एक डिजिटल चिप में चंद्रमा की यात्रा कर सकता है। यह एक तरह से आपकी मौजूदगी को चंद्रमा तक पहुंचाने का प्रतीकात्मक और रोमांचक तरीका है, भले ही आप शारीरिक रूप से वहां न जाएं। आपका नाम चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाएगा, जो 1972 के बाद पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन है। यह एक ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनने जैसा है। लाखों लोग दुनियाभर से अपने नाम भेज रहे हैं, जिससे यह एक वैश्विक उत्सव बन जाता है। आपका नाम उनमें शामिल होगा। खासकर बच्चों और युवाओं के लिए, यह अंतरिक्ष अन्वेषण के प्रति उत्साह जगाता है। सोचिए, आपका नाम गहरे अंतरिक्ष में, चंद्रमा के पास होगा।
नासा का आर्टेमिस-द्वितीय मिशन चंद्रमा की ओर मानव अंतरिक्ष यात्रा को फिर से शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत यह दूसरा मिशन है, जो आर्टेमिस-प्रथम के बाद आता है, जो एक बिना चालक दल वाला परीक्षण उड़ान था। आर्टेमिस-द्वितीय पहला मानवयुक्त मिशन होगा, जो चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरेगा, लेकिन उतरेगा नहीं। यह मिशन नासा के स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान की क्षमताओं को गहराई से अंतरिक्ष में परीक्षण करेगा। आइए, इस मिशन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
नासा का महत्वाकांक्षी मिशन
आर्टेमिस-द्वितीय मिशन नासा का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है, जो चंद्रमा पर मानवों को वापस लाने और अंततः मंगल ग्रह पर मिशनों की तैयारी करने का लक्ष्य रखता है। यह मिशन लगभग 10 दिनों का होगा, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर एक फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी पर यात्रा करेंगे। यह 1972 में अपोलो 17 के बाद से पहला मानवयुक्त मिशन होगा, जो कम पृथ्वी कक्षा से परे जाएगा। मिशन का मुख्य उद्देश्य ओरियन यान के सभी सिस्टम्स को चालक दल के साथ गहन अंतरिक्ष वातावरण में सत्यापित करना है, जिसमें जीवन समर्थन प्रणाली, नेविगेशन और संचार शामिल हैं। आर्टेमिस-द्वितीय का चालक दल चार अंतरिक्ष यात्रियों से मिलकर बनेगा, जो विविधता का प्रतीक है।
पहले कमांडर, जो नासा के रीड विसमैन हैं। यहीं से पायलट विक्टर ग्लोवर हैं, चंद्रमा यात्रा करने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। मिशन स्पेशलिस्ट नासा के ही क्रिस्टीना कोच होंगे, जो चंद्रमा यात्रा करने वाली पहली महिला होंगी। मिशन स्पेशलिस्ट कैनेडियन स्पेस एजेंसी की जेरेमी हैंसेन होंगे, जो चंद्रमा यात्रा करने वाले पहले गैर-अमेरिकी नागरिक होंगे। बैकअप क्रू में जेनी गिब्बन्स (कैनेडा) और एंड्रे डगलस (नासा) शामिल हैं। यह चयन 2020 के अमेरिका-कनाडा संधि के तहत किया गया है।
कब और कैसे
मिशन की लॉन्च तिथि अप्रैल 2026 निर्धारित है, हालांकि कुछ स्रोतों में 2026 की शुरुआत का उल्लेख है। यह फ्लोरिडा के नासा केनेडी स्पेस सेंटर से ब्लॉक 1 कॉन्फ़िगरेशन के एसएलएस रॉकेट पर उड़ान भरेगा। सितंबर, 2025 तक रॉकेट और ओरियन यान की असेंबली चलती रही है। इससे पूर्व मार्च 2025 में रॉकेट को वर्टिकल पोजीशन में लाया गया था और अगस्त 2025 में ओरियन स्टेज एडाप्टर पहुंचा। मिशन से पहले, मीडिया को इसके हार्डवेयर देखने का अवसर मिला।
सिस्टम टेस्टिंग
ओरियन यान के जीवन समर्थन सिस्टम (जैसे ऑक्सीजन उत्पादन, कार्बन डाइऑक्साइड हटाना) को परीक्षण किया जाएगा, विशेष रूप से व्यायाम और नींद के दौरान।
गहन अंतरिक्ष अनुसंधान
चालक दल सात मुख्य अनुसंधान क्षेत्रों पर काम करेंगे, जैसे नींद पैटर्न मॉनिटरिंग (रिस्टबैंड डिवाइस से), इम्यून सिस्टम प्रभाव (लार और रक्त नमूने से) और ऑर्गन-ऑन-ए-चिप तकनीक का उपयोग। यह डेटा भविष्य के चंद्रमा और मंगल मिशनों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय विकसित करने में मदद करेगा।
लूनर साइंस
चालक दल चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव क्षेत्र की तैयारी के लिए प्रभाव क्रेटर, ज्वालामुखी और बर्फ पर रीयल-टाइम डेटा विश्लेषण करेंगे। ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर में साइंस इवैल्यूएशन रूम से वैज्ञानिकों की टीम मार्गदर्शन देगी।
क्यूबसैट्स
मिशन पर पांच अंतर्राष्ट्रीय क्यूबसैट्स (छोटे उपग्रह) उड़ेंगे, जो पृथ्वी कक्षा में विज्ञान प्रयोग और तकनीकी प्रदर्शन करेंगे। ये ओरियन से अलग होकर लॉन्च होंगे।
भविष्य की योजनाएं
आर्टेमिस-द्वितीय चंद्रमा पर लंबे समय तक मानव उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। यह मिशन आर्टेमिस-तृतीय (2027 में चंद्रमा पर लैंडिंग) की नींव रखेगा, जहां दक्षिण ध्रुव पर दो अंतरिक्ष यात्री उतरेंगे। कार्यक्रम में वाणिज्यिक और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों (जैसे ईएसए का यूरोपीय सर्विस मॉड्यूल) की भूमिका महत्वपूर्ण है। आर्टेमिस मिशन रोबोटिक रोवर्स, हैबिटेशन मॉड्यूल्स और मंगल यात्रा की तैयारी को बढ़ावा देंगे। नासा का यह प्रयास न केवल वैज्ञानिक खोज को बढ़ावा देगा बल्कि वैश्विक सहयोग को मजबूत करेगा।
इस तरह भेजें अपना नाम
इस मिशन में आप अंतिम तिथि 21 जनवरी, 2026 तक निःशुल्क भाग लेकर चंद्रमा पर अपना नाम भेज सकते हैं। इसके लिए नासा की आधिकारिक वेबसाइट https://www3.nasa.gov/send-yourname-with-artemis/ पर क्लिक करें। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरें, जिसमें अपना प्रथम और द्वितीय नाम, पिनकोड डालकर सबमिट बटन पर क्लिक करें। नाम स्वीकृत होने पर आपको एक डाउनलोडेबल ‘बोर्डिंग पास’ मिलेगा। यह एक सर्टिफिकेट जैसा है, जिसमें आपका नाम मिशन के साथ दिखाया जाएगा, जिस पर क्लिक करके आप इसे डाउनलोड कर सकते हो। लॉन्च के समय आप इसकी लाइव स्ट्रीमिंग भी देख सकते हो।
भविष्य का वादारू कल्पना कीजिए चांद पर कॉलोनी, हीलियम-3 से अनलिमिटेड एनर्जी या स्पेस टूरिज्म जहां आप वीकेंड पर चंद्रमा घूम आएं। स्पेसएक्स जैसे प्राइवेट प्लेयर्स (एलन मस्क की टीम) स्टारशिप से इसे रियलिटी बना रहे हैं। भारत का अगला चंद्रयान-4 भी सैंपल रिटर्न पर फोकस करेगा। ये सिर्फ साइंस नहीं, बल्कि ग्लोबल कोऑपरेशन का उदाहरण है-अमेरिका, यूरोप, जापान, भारत सब साथ में आर्टेमिस एकोड्र्स पर साइन कर चुके हैं।
रोमांचक क्षण
यह पहली क्रूड मिशन 50 साल बाद, जिसमें चार एस्ट्रोनॉट्स चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाएंगे, आप भी इस रोमांच हिस्सा बन सकते हैं। कल्पना कीजिए, आपका नाम चंद्रमा के चारों ओर 2,30,000 मील की दूरी तय कर रहा है। यह आपको अंतरिक्ष यात्री जैसा महसूस कराता है। नासा का कहना है कि यह आर्टेमिस जेनेरेशन को प्रेरित करने के लिए है, यानी नई पीढ़ी को विज्ञान और खोज की ओर आकर्षित करना।
