सर्दियों में अधकचरे योग शिक्षक कहीं पहुंचा न दे अस्पताल... योगाभ्यास में जरूर अपनाए ये नियम

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: सर्दियों में पश्चिमोत्तानासन, जानु शीर्षासन, तितली आसन का अभ्यास करने से शरीर में स्ट्रेच आता है। मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ सकता है। ठंड में मांशपेशियां कठोर हो जाती हैं। योग अभ्यासियों को इन अभ्यास को नहीं करना चाहिए। यह कहना है लखनऊ विश्वविद्यालय के योग शिक्षक डॉ. अमरजीत यादव का वह बताते हैं कि सर्दियों में शीर्षासन, सर्वांगासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। क्योंकि इन आसनों से ब्लड प्रेशर प्रभावित होता है।

विश्वविद्यालय के योग विभाग के शिक्षक डॉ. अमरजीत यादव का कहना है कि सर्दियों में योग, प्राणायाम करने में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरुरत होती है। योग की गहन जानकारी के बिना ज्यादातर योग शिक्षक शारीरिक व्यायाम करा रहे हैं। वास्तव में शीत ऋतु में शास्त्रीय योग में अनेक सावधानियां रखने को कहा गया है। अन्यथा लाभ होने की जगह हानि उठानी पड़ सकती है। कड़ाके की ठंड में योगाभ्यास के नियमों का पालन करना आवश्यक ही नहीं, बल्कि अनिवार्य होता है।

इन बातों का रखें ध्यान

-योगासन आरंभ करने से पूर्व 10-15 मिनट वार्मअप करें।

-सर्दियों में योगासन हमेशा गर्म या धूप वाली जगह पर करें।

-आरामदायक गर्म कपड़े पहने।

-जमीन पर ऊनी वस्त्र बिछाकर योगासन या प्राणायाम करें।

-खाली पेट या भोजन करने के 3-4 घंटे बाद अभ्यास करें।

-योगासन के दौरान ठंढा पानी न पीएं।

-गुनगुना या हर्बल पेय पीएं।

योग में जोर-जबरजस्ती न करें

योगासनों के दौरान श्वांस पर ध्यान देना आवश्यक होता है। आसनों का अभ्यास धीरे-धीरे और अपने कंट्रोल में करना चाहिए। सर्दियों में शरीर का लचीलापन अन्य मौसमों की अपेक्षा कम होता है इसलिए आसनों के दौरान जोर जबरदस्ती ना करें।

सर्दियों में इन आसनों का करें अभ्यास

सर्दियों में किए जाने वाले अभ्यासों में सूर्य नमस्कार, वार्म-अप, स्ट्रेच जिसमें गर्दन घूमाना, कंधे का रोटेशन, कमर का व्यायाम, घुटने और टखनों का व्यायाम प्रमुख है। ताड़ासन, त्रिकोणासन, वीरभद्रासन, उत्कटासन यह खड़े होकर किए जाने वाले आसन हैं इनके अभ्यास से शरीर में गर्मी और ताकत बढ़ती है। शरीर की जकड़न कम करने हेतु सर्दियों में भुजंगासन, सलभासन, धनुरासन, मार्जरी आसन का अभ्यास उपयोगी पाया गया है। पेट और पाचन के लिए पवनमुक्तासन, नोकासन और वज्रासन करना चाहिए।

 

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