मकर संक्रांति के बाद UP कैबिनेट में बड़ा फेरबदल तय : CM योगी ने दिल्ली में की पीएम मोदी और नड्डा से मुलाकात

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Published By Deepak Mishra
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लखनऊ, अमृत विचार। मकर संक्रांति के बाद प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव की पटकथा लिखी जा चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोमवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा से हुई मुलाकात के बाद यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार सिर्फ विस्तार नहीं, शुद्धिकरण भी होगा। पूरे मामले में गृह मंत्री अमित शाह के यहां से परफॉर्मेंस के आधार पर ‘आउट’ और नए चेहरों की ‘एंट्री’ वाले नामों की सूची आखिरी क्षण में लखनऊ आएगी। योगी ने देर शाम शाह से भी मुलाकात की।

मकर संक्रांति के बाद योगी सरकार नए तेवर में दिख सकती है। यह विस्तार नहीं, रणनीतिक री-लॉन्च होगा। सूत्रों के मुताबिक, इस बार कसौटी वरिष्ठता नहीं, सख्त परफॉर्मेंस है। जिन विभागों में योजनाओं की गति सुस्त रही, जनशिकायतें बढ़ीं या फील्ड फीडबैक कमजोर रहा, उनकी कुर्सी पर खतरा माना जा रहा है। वहीं, जिन मंत्रियों ने कानून-व्यवस्था, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और जनकल्याण में ठोस नतीजे दिए, वे सुरक्षित हैं। कुछ को अतिरिक्त जिम्मेदारी भी मिल सकती है।

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि शीर्ष नेतृत्व सरकार को और आक्रामक, चुनाव-रेडी और ग्राउंड-कनेक्टेड बनाना चाहता है। पश्चिमी यूपी, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और तराई चारों दिशाओं में क्षेत्रीय असंतुलन साधने पर खास ध्यान है। साथ ही, गैर-यादव ओबीसी, दलित और महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की तैयारी है।

मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पद स्थायी अधिकार नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व है। इसी लाइन पर मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार हुआ है। योजनाओं की डिलीवरी, जिलों से फीडबैक, जनसुनवाई और मीडिया-पब्लिक परसेप्शन सब शामिल है। संदेश साफ है कि परिणाम लाओ या रास्ता दो।

संगठनात्मक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व

भाजपा नेतृत्व मंत्रिमंडल को संगठन के साथ एक-सुर में लाने की रणनीति पर है। क्षेत्रीय असंतोष दूर करने और सामाजिक समीकरण साधने के लिए नए चेहरों को मौका, वहीं कमजोर कड़ियों को बाहर किया जा सकता है। मंत्रिमंडल में बने रहने की शर्तें हैं डिलीवरी, ग्राउंड प्रेजेंस और जनविश्वास। वरिष्ठता या लॉबिंग इस बार काम नहीं आएगी।

संभावित नए चेहरे

• पश्चिमी यूपी से एक गैर-यादव ओबीसी चेहरा
• पूर्वांचल से संगठन-पृष्ठभूमि वाला सक्रिय विधायक
• बुंदेलखंड से युवा नेतृत्व
• दलित/महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर विचार

पिछला विस्तार

2022: योगी 2.0 कैबिनेट

2023–24: सीमित फेरबदल

2025: परफॉर्मेंस रिव्यू

जनवरी 2026 बड़ा फेरबदल

 

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