CSR खर्च जरूरी है, लेकिन तरीका सही होना चाहिए... IIM लखनऊ के शोधकर्ताओं ने इक्विटी पर दिए निष्कर्ष

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Published By Muskan Dixit
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484 भारतीय कंपनियों के आंकड़ों का शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया

लखनऊ, अमृत विचार : भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि कंपनियों द्वारा किया जाने वाला अनिवार्य कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) खर्च हमेशा कंपनियों के लिए फायदेमंद नहीं होता। कई मामलों में यह खर्च कंपनियों के लिए शेयर बाजार से पैसा जुटाना महंगा बना देता है। यह शोध आईआईएम लखनऊ के वित्त एवं लेखांकन विभाग के प्रोफेसर डॉ. शेषादेव साहू और उनकी शोध छात्रा डॉ. सुकन्या वाधवा ने किया है। इस अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त जर्नल ऑफ अकाउंटिंग इन इमरजेंसी इकोनॉमिक्स में प्रकाशित किया गया है।

देश में कंपनी अधिनियम 2013 के तहत बड़ी कंपनियों को अपने मुनाफे का एक हिस्सा सामाजिक कामों पर खर्च करना जरूरी है। इसे कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी कहते हैं। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरीबी उन्मूलन जैसे कार्य शामिल हैं। इसका उद्देश्य है कि कॉरपोरेट कंपनियां समाज के कमजोर वर्गों के विकास में योगदान दें। शोधकर्ताओं ने वर्ष 2014 से 2020 के बीच 484 भारतीय कंपनियों के आंकड़ों का अध्ययन किया। ये सभी कंपनियां गरीबी कम करने से जुड़े सीएसआर कार्यक्रमों पर खर्च कर रही थीं। अध्ययन का मकसद यह समझना था कि निवेशक इस तरह के अनिवार्य खर्च को कैसे देखते हैं और इसका कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर क्या असर पड़ता है।

शेयर बाजार से पूंजी जुटाना मुश्किल

अध्ययन में पाया गया कि जब सीएसआर खर्च अनिवार्य होता है, तो कई निवेशक इसे कंपनी की मजबूरी मानते हैं, न कि उसकी इच्छा। ऐसे में निवेशक मानते हैं कि कंपनी का पैसा ऐसे कामों में जा रहा है, जिससे सीधे मुनाफा नहीं होगा। इसी वजह से वे निवेश के बदले ज्यादा रिटर्न की मांग करते हैं। इसका सीधा असर यह होता है कि कंपनियों की कॉस्ट ऑफ इक्विटी यानी शेयर बाजार से पूंजी जुटाने की लागत बढ़ जाती है।

अध्ययन में यह तथ्य सामने आए

यह असर हर क्षेत्र में समान नहीं है। उद्योग और निर्माण क्षेत्र की कंपनियों में सीएसआर खर्च से निवेशकों की चिंता बढ़ी। सेवा क्षेत्र की कंपनियों, जैसे आईटी, बैंकिंग, कंसल्टेंसी और अन्य सेवाओं से जुड़ी कंपनियों में सीएसआर खर्च को सकारात्मक रूप से देखा गया। कारण यह है कि सेवा क्षेत्र की कंपनियों की छवि, भरोसा और ब्रांड वैल्यू पर सीएसआर का सीधा असर पड़ता है। इसलिए निवेशक वहां इसे अच्छा संकेत मानते हैं।


“अगर कंपनियां सिर्फ कानून का पालन करने के लिए सीएसआर करेंगी, तो निवेशक इसे बोझ समझेंगे। लेकिन अगर कंपनियां ईमानदारी से समाज के लिए काम करें और सीएसआर को अपने व्यापार से जोड़ें तो इससे कंपनी और समाज दोनों को फायदा होगा।”

— प्रो. शेषादेव साहू, आईआईएम, लखनऊ

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