हंसराज हत्याकांड : गड्ढे में शव दफनाने के दौरान डाला गया था नमक, भतीजा भी गिरफ्तार
पीलीभीत/बिलसंडा। जमीन के विवाद में भाई की हत्या कर पशुशाला में शव दफनाने के मामले में पुलिस ने मृतक के भाई-भाभी के बाद फरार चल रहे नामजद आरोपी भतीजे को भी धर दबोचा। पूछताछ के बाद चालान कर आरोपी को जेल भेज दिया है। पकड़े गए तीसरे आरोपी ने ये भी बताया कि शव दफनाने के दौरान काफी नमक भी डाला गया था।
बता दें कि बीसलपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम भौरुआ के रहने वाले पृथ्वीराज सिंह ने करेली थाने में तहरीर देकर बताया था कि उनका भाई हंसराज 12 दिसंबर को घर से करेली थाना क्षेत्र के ग्राम लिलहर मझले भाई नक्षत्रपाल के घर गया था। इसके बाद से वह वापस नहीं आया। जानकारी करने पर पता चला कि 14 दिसंबर को रात में नक्षत्रपाल छोटे भाई हंसराज को राकेश राठौर के पास से बुलाकर ले गया।
इसके बाद मारपीट की। उन्होंने मझले भाई नक्षत्रपाल, उसकी पत्नी राधा और पुत्र ज्ञानेंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने शुक्रवार शाम को आरोपी नक्षत्रपाल के घर की पशुशाला से हत्या कर दफनाए गए हंसराज के शव को बरामद कर लिया था। जमीन के विवाद में हत्या की गई थी। पुलिस ने आरोपी नक्षत्रपाल, उसकी पत्नी राधा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तीसरा आरोपी भतीजा ज्ञानेंद्र हत्थे नहीं चढ़ सका था। पुलिस की टीमें उसकी सुरागरसी में जुटी हुई थी। छह जनवरी को करेली पुलिस ने तीसरे नामजद आरोपी ज्ञानेंद्र पुत्र नक्षत्रपाल को भी गिरफतार कर लिया और उसे जेल भेज दिया है।
घटना की रात ही गाजियाबाद से घर आया था आरोपी ज्ञानेंद्र
पूछताछ में आरोपी ज्ञानेंद्र ने बताया कि उसके पिता तीन भाई थे। सबसे बड़े पृथ्वीराज, मझले उसके पिता आरोपी नक्षत्रपाल और सबसे छोटे हंसराज थे। पिता का पैतृक गांव भौरुआ था। लिलहर में फुफेरे नाना नत्थू सिंह रहते थे। उनके कोई बच्चा नहीं था। जिसके चलते उन्होंने उसकी दादी-दादा को अपने पास रख लिया था। सात-आठ बीघा जमीन पिता नक्षत्रपाल ने अपने नाम करा ली थी। इसी में आए दिन मृतक चाचा हंसराज हिस्सा मांगते थे। इसी को लेकर झगड़ा फसाद होता था। उसने बताया कि 14 दिसंबर की रात को गाजियाबाद से वह देर रात अपने घर पहुंचा। फिर पिता के साथ जाकर चाचा को घर पर लेकर आए। पिता ने लाठी से वार किए। माता-पिता के साथ मिलकर गड़्ढा खोदकर चाचा हंसराज के शव को दफना दिया था। इस दौरान शव पर काफी नमक भी डाला गया था।
