कानपुर : पुलिस कमिश्नर के साथ हुई बैठक फिर भी हैलट से नहीं हटी निजी एम्बुलेंस, चरम पर है चालकों की आराजकता

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
On

कानपुर, अमृत विचार। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट इमरजेंसी के पास निजी एंबुलेंस चालकों की आराजकता अपने चरम पर है। चंद कदम की दूरी पर बनी हैलट चौकी की पुलिस इन निजी एंबुलेंस चालकों को अस्पताल से बाहर खदेड़ने में नाकाम साबित हो रही है। यह हाल तब है, जब जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला ने खुद पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल से बैठक में इन निजी एंबुलेंस चालकों की अराजकता के संबंध में जानकारी देकर कार्रवाई की मांग की थी। तब भी स्वरूप नगर व हैलट चौकी की पुलिस इन पर लगाम नहीं लगा पा रही है। 

हैलट अस्पताल की इमरजेंसी, ओपीडी के पीछे, मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल व जच्चा-बच्चा अस्पताल जीटी रोड की तरफ निजी एंबुलेंस वाले पूरे दिन और रात मरीजों का शिकार करने में लगे रहते हैं। यह निजी एंबुलेंस वाले अस्पताल में आने वाले मरीजों को अपना शिकार बनाकर उन्हें प्राइवेट नर्सिंग या अस्पताल में बेचने का काम कर रहे है, जहां से इन निजी एंबुलेंस संचालकों व चालकों को मोटी रकम मिलती है, जितने दिन मरीज निजी अस्पताल में भर्ती रहता है, इनका रुपया भी बढ़ता रहता है।

इन एंबुलेंस चालकों को भागने का प्रयास जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो.संजय काला व हैलट अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. आरके सिंह कई बार कर चुके हैं, लेकिन तगड़ी सेटिंग की वजह से इन एंबुलेंस चालकों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। जबकि इमरजेंसी के पास ही हैलट चौकी बनी हैं। अभी शनिवार को ही प्राचार्य प्रो.संजय काला ने पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल से निजी एंबुलेंस चालकों को अस्पताल से बाहर खदेड़ने और दिखने पर पुलिस कार्रवाई की मांग की है। लेकिन अभी तक स्वरूप नगर थाने या हैलट चौकी की पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

इसकी वजह से यह लोग 24 घंटे हैलट इमरजेंसी के सामने डटे रहते हैं और अस्पताल में सही इलाज न मिलने आदि बातें बोलकर यहां पर आने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को गुमराह कर सरकार की छवि भी धूमिल कर रहे हैं। इनका मुख्य फोकस 108 नंबर से आने वाले मरीज भी होते हैं। प्राचार्य प्रो.संजय काला ने बताया कि निजी एंबुलेंस चालकों पर कार्रवाई के लिए पुलिस कमिश्नर से वार्ता की गई है, जल्द ही अभियान चलाकर इनको अस्पताल से बाहर खदेड़ा जाएगा। स्वरूप नगर थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि बैठक से पहले भी अभियान संचालित किया जा चुका है, अब आदेश का पालन कराया जाएगा। 

आरटीओ को भी लिखा जा चुका है पत्र

पुलिस प्रशासन द्वारा इन निजी एंबुलेंस चालकों पर कोई कार्रवाई नहीं करने किए जाने पर हैलट प्रशासन आरटीओ को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग कर चुका है। पत्र में कहा था कि अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में निजी एंबुलेंस वाले एकत्र रहते हैं। अधिकांश एंबुलेंस गैंस सिलिंडर वाली है। इस वजह से अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर खतरा और अनहोनी का भी डर है। बावजूद इसके इन लोगों का यहां पर काफी बोलबोला है। वहीं, हैलट में सुरक्षा के लिए तैनात किए गए सेवानिवृत्त अद्धसैनिक बल के सुरक्षा गार्ड इनको बाहर नहीं भगा पा रहे हैं, जबकि इमरजेंसी पास सुरक्षा गार्ड भी तैनात किए जाते है। 

जांच के लिए तैनात रही ई-एंबुलेंस

हैलट अस्पताल में भर्ती कई मरीजों को जांच के लिए हैलट परिसर, कार्डियोलॉजी संस्थान व मुरारी लाल चेस्ट जाना पड़ता है। इसके लिए यहां पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने ई-एंबुलेंस की सुविधा की है, लेकिन इसके बाद भी कुछ कर्मचारी व गार्ड कुछ रुपयों की लालच में निजी एंबुलेंस वालों के संपर्क में रहते हैं और जांच के लिए निजी एंबुलेंस वालों को बुलाकर भेजते हैं। वही, सूत्रों के मुताबिक निजी एंबुलेंस वाले मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल या कार्डियोलॉजी संस्थान में जांच कराने ले जाने का पांच सौ रुपये से एक हजार तक चार्ज मरीज या उनके तीमारदारों से वसूल लेते हैं। जबकि ई-एंबुलेंस में यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क है।

संबंधित समाचार