चिड़िया-चमगादड़ जैसा ड्रोन, रडार के लिए अननोन 

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
On

आईआईटी कानपुर ने चिड़िया जैसे दिखने वाले और पंख फड़फड़ाकर उड़ने वाले ऑर्निथॉप्टर ड्रोन विकसित किए हैं। धातु का उपयोग काफी कम होने के कारण ये ड्रोन आसानी से दुश्मन के रडार को चकमा देने में सक्षम हैं। इन ड्रोन को एक किलोमीटर की ऊंचाई पर 400 मीटर की दूरी में लगातार उड़ाया जा सकता है। इसके संचालन के लिए न तो किसी मानवीय कंट्रोल की जरूरत होती है, न ही उड़ान के दौरान किसी लगातार मिलने वाले सिग्नल की। सिग्नल कटने पर भी यह ड्रोन अपना मिशन पूरा करके वापस लौटने की तकनीक से लैस है। इस ड्रोन को भविष्य के युद्ध के लिए नया वेपन माना जा रहा है। इस तरह के ड्रोन सेना के लिए सीमा सुरक्षा, निगरानी और अन्य मिशनों जैसे बचाव अभियान, पर्यावरणीय डेटा संग्रह के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकते हैं।- राजीव त्रिवेदी, कानपुर

बर्ड ड्रोन में पंखे नहीं, फिर भी पंख फड़फड़ाकर उड़ता

भारत की रक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में आईआईटी कानपुर लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में संस्थान की अनस्टेडी एयरोडायनेमिक्स लैब द्वारा प्रो. देवोपम दास, पूर्व छात्र जयदीप भौमिक और शरमन दास के नेतृत्व में एक ऐसा अनोखा ड्रोन तैयार किया गया है, जो दुश्मन को बिना पता चले उसकी निगरानी कर सकता है। इस बर्ड ड्रोन में पंखे नहीं बल्कि पंख लगे हैं। पक्षियों या चमगादड़ों की तरह पंख फड़फड़ाकर उड़ने के कारण ये ड्रोन बहुत शांत और रडार अभेद्य हैं। सेंसर व कैमरों से लैस इन ड्रोन को खासतौर पर निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है। 

सूक्ष्म निगरानी के साथ सीक्रेट मिशन तक 

बर्ड ड्रोन का सबसे बड़ा मॉडल 1.6 मीटर आकार का है, जबकि सबसे छोटा मॉडल केवल 5 इंच का है। छोटे मॉडल का इस्तेमाल माइक्रो निगरानी और सीक्रेट मिशनों में किया जा सकता है, जबकि बड़े मॉडल को लंबी रेंज के लिए डिजाइन किया गया है। बड़ा मॉडल 800 ग्राम से 1 किलो तक पेलोड उठा सकता है। छोटा मॉडल 100 से 200 ग्राम तक पेलोड उठाने में सक्षम है। स्वायत्त संचालन जीपीएस आधारित प्रणाली के साथ, ये बिना पायलट के उड़ सकते हैं।   

सिग्नल जाम या कनेक्शन टूटने पर भी काम अंजाम देने में सक्षम

इसे उड़ाने के लिए ह्यूमन कंट्रोल की जरूरत नहीं पड़ती है। उड़ान से पहले इसका पूरा आवश्यक डेटा इसके ऑनबोर्ड सिस्टम में फीड किया जाता है। इससे अगर मिशन के बीच दुश्मन सिग्नल जाम कर दें या ग्राउंड स्टेशन से कनेक्शन टूट जाए तो भी यह खुद रास्ता पहचानकर स्वतंत्र रूप से ऑपरेट करने में सक्षम है। मिशन पूरा होने के बाद यह अपने आप वापस बेस पर लौट आ सकता है।

आवाज नहीं करता, एनर्जी सेव करने से लंबे समय तक उड़ता

साधारण ड्रोन जहां चार मोटरों और प्रोपेलरों के सहारे उड़ान भरते हैं। वहीं आईआईटी कानपुर का यह ऑर्निथॉप्टर बिल्कुल अलग तरह से काम करता है। इसमें न तो प्रोपेलर लगाए गए हैं और न ही चार मोटरों की जरूरत पड़ती है। इसके पंख एक ही मोटर से उड़ सकते हैं। जो लिफ्ट और थ्रस्ट दोनों प्रोड्यूस करते हैं। इस कारण इसमें एनर्जी बहुत ज्यादा सेव होती है। सामान्य ड्रोन उड़ान के दौरान काफी आवाज करते हैं और उनकी बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है, लेकिन बर्ड जैसा दिखने वाला ड्रोन बेहद कम आवाज के साथ लंबी दूरी तय कर सकता है। एनर्जी की बचत और वजन में हल्का होने के कारण यह करीब 1 घंटे 20 मिनट तक लगातार उड़ान भर सकता है। इसके मुकाबले सामान्य ड्रोन अधिकतम आधा घंटा तक ही उड़ पाते हैं।

सेना ने दिखाई अपनी रुचि

इस ड्रोन की क्षमता को देखते हुए भारतीय सेना की ओर से गहरी रुचि दिखाई गई है। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट तैयार कर लिया गया है। दुश्मन के क्षेत्र में यह एक सामान्य बर्ड जैसा दिखाई देने के कारण जासूसी, बॉर्डर पेट्रोलिंग और सेंसिटिव मिलिट्री एरिया में बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

 चीन के ऑर्निथॉप्टर ड्रोन से बेहतर इसका ऑटोनोमस मोड  

चीन पहले ही पक्षी जैसे दिखने वाले ऑर्निथॉप्टर ड्रोन बना चुका है। ये ड्रोन पक्षियों की तरह उड़ने की नकल करते हैं और सैन्य निगरानी और टोही अभियानों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसके मुकाबले आईआईटी में तैयार को ड्रोन को ऑटोनोमस मोड में डिजाइन किया गया है। इसके ऑटोनोमस कंट्रोलर को जीपीएस, आईएमयू (इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट) और एडवांस कैमरा डेटा के आधार पर बनाया गया है। इसके चलते सेना में जब कई बार जीपीएस बंद कर दिया जाता है, तब भी इसका कैमरा और सेव किया हुआ डेटा इसे सही डायरेक्शन और लोकेशन में आगे बढ़ने में मदद करेंगे। यही खासियत इसे दूसरे इस तरह के सभी ड्रोन से अलग बनाती है।

अभी तक डच कंपनी बर्ड ड्रोन के विकास में दुनिया में अग्रणी

डच प्रौद्योगिकी कंपनी ड्रोन बर्ड कंपनी पक्षी के आकार के ड्रोन के विकास में विश्व में अग्रणी मानी जाती है। उसका फाल्कन ड्रोन बर्ड रिमोट कंट्रोल रोबोटिक शिकारी पक्षी जैसा है। यह दिखने और वजन में बिल्कुल असली पक्षी जैसा लगता है। ड्रोन बर्ड कंपनी का बनाया हुआ स्थिर पंखों वाले पेरेग्रीन फाल्कन का उपयोग हवाई अड्डों और तेल एवं गैस तथा ड्रेजिंग क्षेत्रों में  व्यावसायिक रूप से किया जा रहा है ताकि पक्षियों की संख्या और विमानों से पक्षियों के टकराने की घटनाओं को कम किया जा सके।

 

 

टॉप न्यूज