रोचक किस्सा : हजार असफलताएं, एक महान आविष्कार
विज्ञान के इतिहास में थॉमस अल्वा एडिसन का नाम केवल आविष्कारों के लिए ही नहीं, बल्कि उनकी जिद, मेहनत और असफलताओं से सीखने की क्षमता के लिए भी याद किया जाता है। एडिसन का सबसे मशहूर किस्सा विद्युत बल्ब के आविष्कार से जुड़ा है, जो आज भी लोगों को प्रेरित करता है।
उन्नीसवीं सदी के अंत में जब दुनिया अंधकार में डूबी रहती थी और रोशनी के साधन सीमित थे, तब एडिसन ने एक ऐसा बल्ब बनाने का सपना देखा, जो सुरक्षित हो, सस्ता हो और लंबे समय तक जल सके। यह सपना साकार करना आसान नहीं था। बल्ब के भीतर जलने वाले फिलामेंट के लिए सही सामग्री ढूँढना सबसे बड़ी चुनौती थी।
एडिसन ने अपने प्रयोगशाला में दिन-रात मेहनत करते हुए हजारों प्रयोग किए। उन्होंने कपास, बांस, लकड़ी, रेशम, घोड़े के बाल और कई अन्य पदार्थों को फिलामेंट के रूप में आजमाया, लेकिन हर बार परिणाम असफल रहा। प्रयोग असफल होते गए, लेकिन एडिसन का हौसला कम नहीं हुआ।
एक बार एक पत्रकार ने उनसे सवाल किया कि इतनी बार असफल होने के बाद भी वे निराश क्यों नहीं होते। इस पर एडिसन ने शांत स्वर में उत्तर दिया, “मैं असफल नहीं हुआ हूँ, मैंने बस यह खोजा है कि बल्ब बनाने के हजारों तरीके काम नहीं करते।” यह कथन उनके सकारात्मक दृष्टिकोण और वैज्ञानिक सोच को दर्शाता है।
आखिरकार वर्ष 1879 में एडिसन ने कार्बन फिलामेंट का उपयोग कर ऐसा विद्युत बल्ब तैयार किया, जो कई घंटों तक लगातार जल सका। इस आविष्कार ने न केवल रातों को रोशन किया, बल्कि उद्योग, शिक्षा और समाज के विकास को भी नई दिशा दी। एडिसन का यह किस्सा हमें सिखाता है कि विज्ञान केवल बुद्धि का नहीं, बल्कि धैर्य, निरंतर प्रयास और असफलताओं को सफलता की सीढ़ी मानने का नाम है। यही सोच किसी भी बड़े आविष्कार की नींव होती है।
