रबड़ फैक्ट्री : नोटिस तामील न होने पर सिविल कोर्ट से फिर मिली तारीख
प्रशासन ने सम्मन तामील कराने के लिए समाचार पत्र में प्रकाशन की अर्जी दी
बरेली, अमृत विचार। रबड़ फैक्ट्री की अरबों रुपये कीमत की करीब 1300 एकड़ भूमि पर कब्जा लेने के लिए अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व की ओर से दाखिल वाद में सिविल जज जूनियर डिवीजन कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है लेकिन कोर्ट से जारी सम्मन मुंबई में रबड़ फैक्ट्री के प्रबंधन सहित अन्य पक्षों को तामील नहीं हुए हैं। दो तारीखों पर सुनवाई हो चुकी है। 6 जनवरी को सुनवाई हुई। जिसमें प्रशासन की ओर से सम्मन तामील कराने के लिए समाचार पत्र में प्रकाशन की अर्जी कोर्ट में लगाई गई। अब 5 फरवरी की तारीख लगी है।
दरअसल, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व संतोष कुमार सिंह की ओर से पिछले साल सितंबर माह में सिविल कोर्ट में सिविल सूट दाखिल किया गया। जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल पुरुषोतम पटेल पैरवी कर रहे हैं। वहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट में पिटीशन अलकेमिस्ट एसेट्स रिकंस्ट्रक्शन लिमिटेड बनाम मेसर्स सिंथेटिक एंड केमिकल्स लिमिटेड व अन्य के केस में राज्य सरकार पक्षकार के प्रकरण में पैरवी जारी है। 2023 में बॉम्बे हाईकोर्ट की सिंगल बेंच से जिला प्रशासन को राहत मिली थी। जिला प्रशासन ने शासन से दो और वकील नामित करने के साथ अलग से वाद दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। कुछ माह पहले बॉम्बे हाईकोर्ट व डीआरटी (ऋण वसूली न्यायाधिकरण) में अलग-अलग वाद दर्ज कराने की मंजूरी शासन ने दी थी लेकिन अधिवक्ता आदित्य ठक्कर और सौभाग्य अग्रवाल ने भूमि पर कब्जा लेने के संंबंध में बरेली में ही सिविल कोर्ट में वाद दर्ज कराने का सुझाव दिया था। बता दें कि रबड़ फैक्ट्री स्थापित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 1960 के दशक में मुंबई के सेठ किलाचंद को 3.40 लाख रुपये लेकर 1382.23 एकड़ भूमि लीज पर दी थी। लीज डीड में शर्त शामिल थी कि फैक्ट्री बंद होने पर सरकार जमीन वापस ले लेगी, लेकिन 15 जुलाई 1999 को फैक्ट्री बंद होने पर राज्य सरकार जमीन पर कब्जा नहीं ले पाई थी।
