यूपी में ट्रामा केयर नीति में सुधार... 9 सदस्यीय टास्क फोर्स गठित, दी गई ये जिम्मेदारी

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार : राज्य सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं और आपात स्थितियों में होने वाली मृत्यु दर घटाने के लिए स्टेट ट्रामा केयर नीति बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए नौ सदस्यीय टेक्निकल टास्क फोर्स का गठन किया गया है। टास्क फोर्स प्रत्येक जिले में लेवल-वन, टू और थ्री ट्रामा नेटवर्क के मानक और संचालन नियम तैयार करेगी, साथ ही अंतर जनपदीय और अंतर राज्यीय रेफरल प्रणाली की रूपरेखा बनाएगी।

टास्क फोर्स के अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं स्टेट नोडल आफिसर प्रो. एलडी मिश्रा, जबकि सचिव पद पर एसजीपीजीआई के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के हेड प्रो. आरके सिंह और केजीएमयू ट्रामा सेंटर के सीएमएस डॉ. प्रेम राज सिंह होंगे। यह टीम ट्रामा सेंटर के न्यूनतम मानव संसाधन और आधारभूत संरचना के मानक तय करेगी। 

साथ ही राज्यव्यापी रेफरल प्रोटोकॉल, 108 एंबुलेंस सेवा का ट्रामा नेटवर्क से जुड़ाव, और राष्ट्रीय व राज्य राजमार्ग के निकट जिला अस्पताल, सीएचसी और पी लएचसी को उच्चीकृत ट्रामा एवं आपातकालीन केंद्र बनाने की योजना तैयार करेगी। टास्क फोर्स को 15 दिन में कार्ययोजना शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मिलेगा कैशलेस उपचार

राज्य में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार योजना 2025 (सीटीआरएवी) को व्यापक किया जा रहा है। अब आयुष्मान योजना के अस्पतालों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, ट्रामा सुविधाएं, आर्थोपैडिक, इमरजेंसी मेडिसिन और सर्जरी की सुविधा देने वाले नए अस्पताल भी स्वत: योजना में शामिल माने जाएंगे। स्टेट एजेंसी फॉर कंप्रीहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) को इन अस्पतालों के कर्मचारियों को कैशलेस उपचार प्रणाली पर प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी दी गई है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने सड़क दुर्घटना हॉटस्पॉट के पास के अस्पतालों को विशेष रूप से सीटी आरएवी में सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के माध्यम से हॉटस्पॉट के निकट अस्पतालों की पहचान की जा रही है, ताकि आपातकालीन चिकित्सा सेवा से पीड़ितों की जान बचाई जा सके। साचीज ने जिलों में तैनात आयुष्मान योजना के नोडल अधिकारी और कर्मचारियों को सीटीआरएवी प्रशिक्षण दिया है, जो अब मास्टर ट्रेनर के रूप में नए अस्पतालों के कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेंगे।

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