राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के आरोप में बड़ा एक्शन: आजमगढ़ के प्रसिद्ध मदरसा अशरफिया की मान्यता रद्द

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
On

इंद्रभूषण दुबे/राज्य ब्यूरो, लखनऊ, अमृत विचार: राष्ट्रविरोध गतिविधियों संलिप्त आजमगढ़ मुबारकपुर स्थित मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम की मान्यता रद्द कर दी गई है। यह आदेश उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने शुक्रवार को जारी किया। मदरसा बोर्ड ने मदरसा प्रबंधन द्वारा की गई गंभीर, सुनियोजित और निरंतर अनियमितताएं, वित्तीय गड़बड़ियां और राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों को आधार बताते हुए कार्रवाई की है।

परिषद के अभिलेखों के अनुसार, आजमगढ़ मुबारकपुर स्थित मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम को मान्यता करीब 78 वर्ष पूर्व 28 सितंबर, 1948 को उच्च आलिया स्तर की स्थायी मान्यता प्रदान की गई थी। लेकिन उपलब्ध दस्तावेजों, विभागीय जांच, पंजीकृत एफआईआर और एटीएस की जांच रिपोर्ट के सम्यक परीक्षण में यह तथ्य निर्विवाद रूप से सामने आया कि मदरसा प्रबंधन ने मान्यता की शर्तों और मदरसा सेवा विनियमावली का घोर उल्लंघन किया।

विदेश में इमाम, यहां से लेता रहा वेतन और पेंशन

जांच में सामने आया कि ब्रिटेन नागरिकता हासिल करने के बाद मौलाना शमसुल हुदा खान को अवैतनिक अवकाश के नाम पर पांच वर्ष सात माह तीन दिन तक मदरसे से अनियमित रूप से अनुपस्थित रखा गया। इतना ही नहीं, 502 दिनों का चिकित्सीय अवकाश मनमाने ढंग से स्वीकृत किया गया। गंभीर आरोप यह भी है कि भारत की नागरिकता का परित्याग कर ब्रिटेन की एक मस्जिद में इमाम के रूप में नियुक्त होकर विदेश में निवास करने के बावजूद मदरसे से वेतन आहरित कराया गया। सेवाओं के संतोषजनक सत्यापन के बिना स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति स्वीकृत कर पेंशन, जीपीएफ और अन्य सेवानिवृत्त देयकों का अवैध व कपटपूर्ण भुगतान किया गया। परिषद का स्पष्ट कहना है कि यह केवल सेवा नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि राजकोष को वित्तीय क्षति पहुंचाने वाला संगठित आपराधिक कृत्य है।

प्रबंधन की भूमिका संदिग्ध, एफआईआर में बढ़ा नाम

इन अनियमितताओं में मदरसा प्रबंधक सरफराज अहमद, प्रधानाचार्य मोहम्मद अहमद मिस्बाही और निजामुद्दीन की भूमिका प्रथम दृष्टया आपराधिक पाई गई है। इसी के कारण थाना मुबारकपुर, आजमगढ़ में 9 जून 2025 को दर्ज की गई एफआईआर में इनके नाम बढ़ाए गए हैं। मामले की जांच पुलिस कर रही है।

एटीएस रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

एटीएस की जांच रिपोर्ट में शमसुल हुदा की गतिविधियों को अत्यंत गंभीर और संदिग्ध बताया गया है। साथ ही मदरसा प्रबंधन की समस्त गतिविधियों को राज्य की आंतरिक सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और शासन की पारदर्शी अनुदान प्रणाली के प्रतिकूल माना गया है। इससे संस्था की विश्वसनीयता, उद्देश्य और वैधानिक चरित्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।

देश के तीन बड़े मदरसों में है शामिल

आजमगढ़ मुबारकपुर स्थित मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम का नाम देश के तीन बड़े मदरसों में शामिल है। टॉप थ्री में मदरसा अशरफिया के अलावा नदवा और देवबंद का नाम शामिल है। यहां हजारों की संख्या में छात्रों को दीनी तालिम दी जाती है। 78 वर्ष पुराने इस मदरसे का नाम पिछले वर्ष ब्रिटेन नागरिकता हासिल कर वर्षों तक वेतन व पेंशन लेने वाले मौलाना शमशुल हुदा की जांच के बाद सामने आया।

नोटिस का भ्रामक जवाब पड़ा भारी

परिषद कार्यालय ने 6 अगस्त, 2025 को मदरसा प्रबंधक को नोटिस जारी किया था। इसके जवाब में 25 अगस्त 2025 को दी गई आख्या को परिषद ने भ्रामक, गुमराह करने वाली, तथ्यों को छुपाने वाली और मिथ्या कथनों से युक्त बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। परिषद के मुताबिक, मदरसा द्वारा विभागीय निर्देशों, सेवा नियमावली और वित्तीय अनुशासन का खुला उल्लंघन किया गया है।

 

संबंधित समाचार