आशा कर्मियों का परिवर्तन चौक पर प्रदर्शन, 14 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
लखनऊ, अमृत विचार : राज्यव्यापी आह्वान के तहत कड़ाके की ठंड के बावजूद रायबरेली, उन्नाव, बाराबंकी, लखीमपुर और हरदोई से बड़ी संख्या में आशा कर्मी लखनऊ के परिवर्तन चौक पर एकत्र हुईं और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। आशा कर्मियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लंबित मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग की।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए आल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं दिल्ली आशा कर्मचारी संघ की अध्यक्ष श्वेता राज ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार 45वें और 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करने में कोई रुचि नहीं दिखा रही है। उन्होंने कहा कि 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम संहिताएं लागू करने से आशा कर्मियों के कर्मचारी दर्जे की संभावना को खत्म किया जा रहा है, जिससे उनका भविष्य असुरक्षित हो गया है।
मंडल अध्यक्ष गीता मिश्रा ने कहा कि स्वास्थ्य अभियानों में अहम भूमिका निभाने वाली आशा और संगिनियों को वर्षों से प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि आशा कर्मियों का 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बकाया सरकार पर लंबित है। लखीमपुर जिलाध्यक्ष राकिया बानो ने आशा कर्मियों के सम्मान और गरिमा से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में काम करने के बावजूद उन्हें मूलभूत अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं।
उन्नाव और बाराबंकी के जिलाध्यक्षों ने कहा कि मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री की ओर से की गई घोषणाओं के बावजूद तय मानदेय का भुगतान अब तक नहीं किया गया। राज्य कमेटी सदस्य अर्चना रावत ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित 14 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन अपर आयुक्त प्रशासन राधेश्याम यादव को सौंपा गया। ज्ञापन में आशा कर्मियों के स्थाईकरण, न्यूनतम वेतन, ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी, मातृत्व अवकाश तथा लंबित बकाया भुगतान सहित अन्य मांगें शामिल हैं।
