Moradabad: मकर संक्रांति पर 22 वर्ष बाद बन रहा एकादशी का महासंयोग

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद, अमृत विचार। इस बार 22 वर्ष बाद मकर संक्रांति और एकादशी का दुर्लभ व अत्यंत शुभ संयोग एक ही दिन बन रहा है। ज्योतिष एवं धर्मशास्त्रों के अनुसार जब संक्रांति और एकादशी एक साथ आती हैं तो इसका फल अक्षय पुण्य देने वाला माना जाता है। विशेष योग में किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे उत्तरायण की शुरुआत कहा जाता है। उत्तरायण को देवताओं का दिन माना गया है, इसलिए इस काल में किए गए पुण्य कर्म विशेष फलदायी होते हैं। वहीं एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है, जो मोक्षदायिनी और पापों का नाश करने वाली मानी जाती है। ज्योतिषाचार्य दीपक कृष्ण उपाध्याय के अनुसार सूर्य देव 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। 

इसी समय से मकर संक्रांति का आरंभ माना जाएगा, इसलिए त्योहार इसी दिन मनाना शास्त्रसम्मत है। उन्होंने बताया कि महापुण्य काल दोपहर 3:07 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा। इस अवधि में दान, स्नान और पूजा करना विशेष फल प्रदान करेगा। मकर संक्रांति के दिन गुड़ के लड्डू, खिचड़ी, तिल, गुड़, चावल, उड़द, कंबल और वस्त्रों का दान अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। ज्योतिषाचार्य ने स्पष्ट किया कि संक्रांति और एकादशी एक साथ होने के कारण चावल दान को लेकर जो भ्रांति प्रचलित है, वह निराधार है। विष्णु पुराण के अनुसार चावल का दान दोषरहित है, इसलिए श्रद्धालु निसंकोच दान कर सकते हैं।

निरोगी रहने के लिए करें यह उपाय
दीपक कृष्ण उपाध्याय के अनुसार दीर्घायु और निरोगी जीवन के लिए इस दिन औषधि, तेल और आहार का दान करना विशेष लाभकारी होता है। साथ ही स्नान, जप, तप, श्राद्ध और तर्पण का भी विशेष महत्व बताया गया है।

भगवान विष्णु को करें अर्पित
एकादशी के अवसर पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा का विधान है। भगवान को पीले रंग की वस्तुएं अति प्रिय हैं, इसलिए पूजा के दौरान पीले फूल, पीले फल और पीले वस्त्र अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस महासंयोग में विधि-विधान से की गई पूजा भक्तों को आध्यात्मिक शांति और पुण्य फल प्रदान करती है।

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