पुलिस कमिश्नरेट की नई पहलः 170 कर्मियों को मिला हाईटेक प्रशिक्षण, सोशल मीडिया से अपराधियों का डिजिटल फुटप्रिंट तलाशेगी पुलिस
लखनऊ, अमृत विचार : अपराधियों की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखने और विवेचना को अधिक प्रभावी बनाने के लिए लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस ने एक और कदम आगे बढ़ाया है। अब पुलिस सोशल मीडिया के माध्यम से अपराधियों का डिजिटल फुटप्रिंट तलाशेगी। इसी क्रम में पुलिस कमिश्नरेट की स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग शाखा की ओर से सोमवार को सोशल मीडिया टूल्स के प्रभावी प्रयोग को लेकर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला पुलिस लाइन सभागार में आयोजित हुई।
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उत्तर प्रदेश शासन और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के अनुपालन में पुलिस आयुक्त अमरेन्द्र कुमार सेंगर के निर्देशन तथा संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बब्लू कुमार और पुलिस उपायुक्त मुख्यालय अनिल कुमार यादव के नेतृत्व में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न कराया गया। कार्यशाला में पुलिस कर्मियों को ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (ओएसआईएनटी) और विभिन्न फ्री सोशल मीडिया टूल्स के माध्यम से अपराधियों के डिजिटल फुटप्रिंट तलाशने की तकनीक सिखाई गई। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य विवेचना में तेजी लाना और सोशल मीडिया से साक्ष्य जुटाने की वैज्ञानिक समझ विकसित करना रहा।
170 से अधिक पुलिसकर्मियों ने लिया प्रशिक्षण
सहायक पुलिस आयुक्त (महिला अपराध)/साइबर क्राइम सौम्या पाण्डेय के पर्यवेक्षण में आयोजित इस सत्र में यूपी एटीएस के सोशल मीडिया सेल प्रभारी उप निरीक्षक अरविन्द कुमार वर्मा और उनकी टीम ने प्रशिक्षण दिया। इस दौरान करीब 170 पुलिसकर्मियों और सोशल मीडिया स्वाट टीम के सदस्यों को ओपन सोर्स, नेटग्रिड (नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड), एपीओएस, नामित जैसे टूल्स के उपयोग की जानकारी दी गई।
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डिजिटल फुटप्रिंट और सूचना संकलन पर फोकस
प्रशिक्षण सत्र में विशेषज्ञों ने बताया कि किसी संदिग्ध की ई-मेल आईडी, सोशल मीडिया प्रोफाइल और अन्य डिजिटल जानकारियों के आधार पर उसका डिजिटल फुटप्रिंट कैसे निकाला जा सकता है। साथ ही विवेचना के दौरान सोशल मीडिया से साक्ष्य एकत्र करने की विधियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
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दो सत्रों में हुआ प्रशिक्षण
यह कार्यशाला दो सत्रों में आयोजित की गई। पहला सत्र सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक और दूसरा सत्र दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक चला। इसमें लखनऊ के सभी जोनों की सोशल मीडिया स्वाट टीम, वर्ष 2023 बैच के नामित उप निरीक्षक तथा थानों पर तैनात कंप्यूटर और सोशल मीडिया में दक्ष आरक्षी व मुख्य आरक्षी शामिल रहे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार के प्रशिक्षण से पुलिसकर्मी डिजिटल युग की चुनौतियों से बेहतर ढंग से निपट सकेंगे, जिससे विवेचना की गुणवत्ता में सुधार होगा और अपराधियों की पहचान व गिरफ्तारी में तेजी आएगी।
