Makar Sankranti 2026: महापौर और नगर आयुक्त ने परखी घाटों की व्यवस्था, जारी किए दिशा-निर्देश, रैन बसेरों का लिया जायजा
वाराणसी। धार्मिक नगरी काशी में मकर संक्रांति महापर्व पर 15 जनवरी को गंगा में स्नान और दर्शन-पूजन के लिए तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसको लेकर महापौर अशोक तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने गंगा घाटों तथा सड़क मार्गों पर स्वच्छता और व्यवस्थाओं को लेकर विशेष निर्देश जारी किए हैं।
महापौर अशोक तिवारी ने मंगलवार को बताया कि उन्होंने दशाश्वमेध और मान मंदिर घाट तक सघन दौरा किया। सोमवार को निरीक्षण के दौरान रैन बसेरों में ठंड से बचाव की व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। वहीं, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने घाटों की सफाई और रखरखाव में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की है।
उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि शीतलहर के दौरान कोई भी बेसहारा व्यक्ति खुले आसमान के नीचे न रहे। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट एवं मान मंदिर के आसपास सौंदर्यीकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने मुख्य अभियंता (सिविल) को निर्देशित किया कि यहां लगे पुराने और जीर्ण-शीर्ण काउ कैचर को तत्काल हटाकर स्टोन वर्क (चौका) बिछाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए।
साथ ही, घाटों पर स्थित सफाई एवं सामान्य विभाग की चौकियों के टीन शेड को आकर्षक बनाने के लिए उन पर थीम आधारित पेंटिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पर्यटकों के बीच काशी की उत्कृष्ट छवि उभर सके। शौचालयों और डस्टबिन की स्वच्छता को लेकर सख्त रवैया अपनाते हुए नगर आयुक्त ने दशाश्वमेध घाट पर सुलभ शौचालय परिसर का निरीक्षण किया।
वहां गंदगी और यूरिनल पाइप के क्षतिग्रस्त होने पर उन्होंने नगर स्वास्थ्य अधिकारी एवं प्रबंधक (सुलभ) के प्रति भारी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है, जो घोर उदासीनता दर्शाती है।
यदि तत्काल स्वच्छता सुनिश्चित नहीं की गई और उपकरणों की मरम्मत नहीं कराई गई, तो कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि वीआईपी मार्ग होने के बावजूद घाटों पर पशुओं का घूमना बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। अभियान चलाकर मार्ग को पशु-मुक्त करने का आदेश दिया गया है तथा चेतावनी दी गई है कि कार्यों में शिथिलता बरतने पर संबंधित अधिकारी उत्तरदायी होंगे।
