Bareilly : डॉ. त्रिवेणी दत्त 34 वर्षों के अनुभव के साथ करेंगे विश्वविद्यालय का नेतृत्व

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Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। भारतीय पशु अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त अब सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एसवीपीयूएटी), मेरठ के नए कुलपति होंगे। डॉ. दत्त को 34 वर्षों से अधिक शैक्षणिक, अनुसंधान और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले उनके दूरदर्शी, परिणामोन्मुख और किसान-केंद्रित नेतृत्व के लिए जाना जाता है।

डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कृषि विज्ञान में स्नातक की डिग्री के बाद आईवीआरआई से पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन में परास्नातक और पशु प्रजनन में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। 23 वर्षों तक प्रोफेसर व प्रधान वैज्ञानिक रहे। 27 वर्षों से अधिक समय तक प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक), अधिष्ठाता और संयुक्त निदेशक (प्रसार शिक्षा) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने संस्थागत शासन, शैक्षणिक सुधार और प्रसार सेवाओं में नई दिशा दी। उनके नेतृत्व में आईसीएआर-आईवीआरआई को उच्चतम स्तर की मान्यता मिली।

 डॉ. दत्त ने 333 शोध लेख, 29 पुस्तकें और 15 प्रशिक्षण पुस्तिकाएं प्रकाशित की हैं। उनके नेतृत्व में आठ नई पशु नस्लें विकसित हुईं, 18 उत्पाद तैयार किए गए, दो पेटेंट, नौ पंजीकृत डिजाइन और 41 कॉपीराइट दर्ज हुए। तीन प्रौद्योगिकियों का व्यवसायीकरण कर सात औद्योगिक इकाइयों को सक्षम किया गया, जिससे 4.42 करोड़ का राजस्व अर्जित हुआ। इसके अलावा उन्होंने 142 सूचना प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षण उपकरण और 45 मोबाइल अनुप्रयोग और तीन चैटबॉट विकसित किए, जिससे किसान और छात्र दोनों को आधुनिक तकनीक का लाभ मिला।

अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां बढ़ाना होगा लक्ष्य
डॉ. दत्त ने कहा कि उनका लक्ष्य एसवीपीयूएटी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित, डिजिटल रूप से सक्षम और किसान-केंद्रित कृषि विश्वविद्यालय बनाना है। विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय कृषि शिक्षा मान्यता बोर्ड में बी डबल प्लस से ए डबल प्लस, एनएएसी की ए श्रेणी से ए डबल प्लस और राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग में शीर्ष दस स्थान दिलाना उनकी प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही वे नवाचार, स्टार्टअप, कृषि-व्यवसाय, महिला सशक्तिकरण और एफपीओ की संख्या बढ़ाने पर भी ध्यान देंगे। कहा कि विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि विकास में विश्वविद्यालय की भूमिका बढ़ेगी।

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