Bareilly : 1.90 करोड़ खर्च, कुत्ते लोगों को गली-गली और छतों पर दौड़ा रहे बंदर
नगर निगम सीमा क्षेत्र में बंदर पकड़ने का अभियान किया बंद
बरेली, अमृत विचार। आवारा कुत्तों और खूंखार बंदरों से शहर वासियों को निजात दिलाने का दावा करते हुए नगर निगम ने पिछले साल तक 1.90 करोड़ रुपये से अधिक रकम खर्च की है। इस धनराशि से नगर निगम ने जहां 15500 से ज्यादा कुत्तों को पकड़कर बधियाकरण किया, वहीं 5500 बंदरों को पकड़कर पीलीभीत के जंगल में छुड़वाने का दावा किया, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि इतनी मोटी रकम खर्च करने के बावजूद शहरवासियों को कुत्तों-बंदरों से अभी तक निजात नहीं मिली है। आवारा कुत्ते गली-गली तो खूंखार बंदर छत-छत लोगों को दौड़ाकर उन्हें घायल कर रहे हैं।
पिछले साल नवंबर में नगर निगम कार्यकारिणी समिति की बैठक में भी यह तय हुआ कि बंदरों को पकड़ने के लिए हर वार्ड में अभियान चलाया जाएगा, लेकिन ऐसा काेई अभियान धरातल पर नहीं चलाया गया। हालांकि, पिछले कुछ समय से बंदरों को पकड़ने का अभियान बंद चल रहा है। इससे खूंखार बंदर खूब उत्पात मचा रहे हैं। सिकलापुर, राजेंद्र नगर, मॉडल टाउन, सुभाष नगर, नेकपुर, कुंवरपुर बंजरिया आदि क्षेत्रों में छतों पर बंदरों के हमला करने की घटनाओं से लोग परेशान हैं।
दरअसल, पिछले साल अपर नगर आयुक्त शशि भूषण ने अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को कई पत्र लिखते हुए यह जानकारी दी थी कि नगर निगम सीमा क्षेत्र में सितंबर 2024 से 27 अगस्त 2025 तक 5108 बंदर पकड़े थे। मथुरा की मेसर्स इमरान कांट्रेक्टर ने बंदर पकड़े। प्रति बंदर पकड़ने में 717 रुपये खर्च हुए थे। अगस्त तक 3662436 रुपये की रकम खर्च दिखाई थी। इसके साथ वर्ष 2018 से लेकर 31 जुलाई 2025 तक 15296 श्वानों को पकड़कर बधियाकरण करने की बात कही थी। एक कुत्ता पकड़ने पर 917 रुपये का खर्चा दिखाया। इन कुत्तों पर 14026462 रुपये खर्च दिखाए थे। कुत्तों का बधियाकरण सोसाइटी ह्यूमन एंड एनिमल वेलफेयर संस्था ने किया। इसके बाद भी नगर निगम ने बंदरों और कुत्तों को पकड़वाने का अभियान जारी रखा। कुत्तों को पकड़कर उनका बधियाकरण किया। इन माह में भी अनुमान लगाए तो सैकड़ों की संख्या में बंदर-कुत्ते और पकड़े गए। नगर निगम के अधिकारी बंदरों को पकड़ने का अभियान शुरू कराने के लिए निविदा जल्द खुलने की बात कह रहे हैं, जबकि कुत्ते पकड़ने का अभियान चालू बताया है।
बंदरों की आंकड़ेबाजी में मतभेद
पिछले साल वन विभाग के आंकड़ों में जिलेभर में तीन साल पहले 6019 बंदर होने का दावा किया गया था, उनकी संख्या घटकर 1272 बंदर रहना दिखाया गया था, वहीं नगर निगम के अफसरों ने शहरी क्षेत्र में सितंबर 2024 से 27 अगस्त 2025 तक 5108 बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ने का दावा किया था, ऐसे में सवाल खड़े हुए कि वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जनपद में तीन साल पहले बंदर 1272 थे, ऐसे में शहरी क्षेत्र में सालभर में 5100 बंदर कहां से आ गए। बंदरों की आंकड़ेबाजी में दिक्कतें नागरिकों को हो रही हैं।
