LPG संकट के बीच रेलवे में भी हाहाकार! अब नहीं मिलेगा गर्मागर्म खाना... IRCTC ने कैटरिंग यूनिट्स को माइक्रोवेव-इंडक्शन पर स्विच करने के दिए निर्देश 

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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नई दिल्लीः देशव्यापी एलपीजी सिलेंडरों की कमी अब भारतीय रेलवे की कैटरिंग सेवाओं पर भारी पड़ रही है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण एलएनजी और एलपीजी सप्लाई चेन बाधित होने से कमर्शियल सिलेंडरों की भारी किल्लत है, जिसका असर IRCTC के बेस किचनों पर सबसे ज्यादा दिख रहा है। इन बेस किचनों में ही लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए भोजन तैयार होता है, जो बाद में पैंट्री कारों में लोड होकर यात्रियों तक पहुंचता है।

IRCTC का त्वरित कदम

भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने 10 मार्च को जारी एक पत्र में फूड प्लाजा, रिफ्रेशमेंट रूम और 'जन आहार' के संचालकों से यात्रा के दौरान यात्रियों के लिए निर्बाध खानपान सेवाएं बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा। यह सलाह पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष की पृष्ठभूमि में जारी की गई है, जिससे वाणिज्यिक एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। 

सलाह में कहा गया, "एलपीजी आपूर्ति में किसी भी कमी की भरपाई के लिए आपको माइक्रोवेव और इंडक्शन जैसे खाना पकाने के वैकल्पिक तरीके अपनाने होंगे।" खानपान इकाइयों को यात्रियों की मांग को पूरा करने के लिए मानक पैकेट में बंद और पके हुए खाद्य पदार्थों के अलावा तैयार खाद्य पदार्थों का पर्याप्त भंडार बनाए रखने के लिए भी कहा गया है। 

ट्रेनों में क्या होगा? 

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बेस किचनों में खाना पकाने की प्रक्रिया प्रभावित होने से लंबी दूरी की ट्रेनों में ताजा पका भोजन उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है। स्थिति बिगड़ने पर रेलवे ट्रेनों में पके हुए भोजन की सेवा अस्थायी रूप से बंदकरने और पहले से टिकट के साथ भोजन बुक करने वाले यात्रियों को रिफंडदेने पर विचार कर रहा है। फिलहाल सेवा जारी है, लेकिन अगले 15-20 दिनों में असर और गहरा हो सकता है।

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भी हड़कंप

इससे पहले नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) और अन्य होटल-रेस्टोरेंट एसोसिएशंस ने चेतावनी दी थी कि बेंगलुरु, मुंबई, पुणे जैसे शहरों में कमर्शियल एलपीजी की कमी से कई प्रतिष्ठान काम बंद करने की कगार पर हैं। वे मेन्यू सीमित कर रहे हैं, कुछ डिशेज हटा रहे हैं और इंडक्शन/कोल जैसे विकल्प अपना रहे हैं। सरकार ने घरेलू एलपीजी को प्राथमिकता देते हुए रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के आदेश दिए हैं, लेकिन कमर्शियल सेक्टर अभी भी जूझ रहा है।

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