कर्नल सोफिया के खिलाफ टिप्पणी : एमपी के मंत्री विजय शाह की याचिका पर सोमवार को हो सकती है सुनवाई

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Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को मध्य प्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह की उस याचिका पर सुनवाई होने की संभावना है, जिसमें उन्होंने भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ ''अभद्र भाषा'' का प्रयोग करने के आरोप में खुद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी है। 

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ द्वारा मंत्री की याचिका पर सुनवाई किए जाने की संभावना है। मंत्री ने अपनी टिप्पणियों पर खेद व्यक्त किया है। उच्चतम न्यायालय ने 28 जुलाई 2025 को कर्नल कुरैशी के खिलाफ अपनी टिप्पणियों पर सार्वजनिक रूप से माफी न मांगने के लिए शाह को फटकार लगाई थी और कहा था कि वह ''अदालत के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं।'' 

शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने तर्क दिया था कि मंत्री ने सार्वजनिक रूप से माफीनामा जारी किया है, जिसे ऑनलाइन साझा किया गया था और इसे अदालत के रिकॉर्ड में रखा जाएगा। शीर्ष अदालत ने तब कहा था, ''ऑनलाइन माफी क्या होती है? हमें उनकी मंशा और ईमानदारी पर संदेह होने लगा है। आप माफी को रिकॉर्ड पर रखें। हमें इसे देखना होगा।'' 

उसने मंत्री के बयानों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को 13 अगस्त 2025 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। एसआईटी का एक अधिकारी सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट लेकर अदालत में पेश हुआ। पीठ ने कहा था कि शाह के बयानों के बजाय उन लोगों के बयान दर्ज किए जाने चाहिए थे जिनकी भावनाएं आहत हुई थीं। 

उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल 28 मई को कर्नल कुरैशी के खिलाफ शाह की विवादास्पद टिप्पणियों के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष कार्यवाही बंद करने का आदेश दिया और एसआईटी से स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने शाह को फटकार लगाई थी और उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था।

एक वीडियो वायरल होने के बाद शाह आलोचनाओं के घेरे में आ गए थे, जिसमें उन्हें कथित तौर पर कर्नल कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए देखा गया था।  कुरैशी ने एक अन्य महिला अधिकारी विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ मिलकर 'ऑपरेशन सिंदूर' पर मीडिया ब्रीफिंग के दौरान देश भर में प्रसिद्धि हासिल की थी।

उच्च न्यायालय ने कर्नल कुरैशी के खिलाफ ''अपमानजनक'' टिप्पणी करने और ''अभद्र भाषा'' का प्रयोग करने के लिए शाह को फटकार लगाई और पुलिस को उनके खिलाफ शत्रुता व नफरत को बढ़ावा देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।  

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