Weather Forecast: ड्यूल पोलारिमेट्रिक डॉप्लर बताएगा मौसम का हाल, यूपी के इन जिलों में लगाए जाएंगे 5 अत्याधुनिक रडार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को और सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य में पांच अत्याधुनिक ड्यूल पोलारिमेट्रिक डॉप्लर रडार सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं, जो अगले छह महीनों में कार्यात्मक हो जाएंगे। यह जानकारी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, लखनऊ के निदेशक मनीष कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि ये रडार लखनऊ, आज़मगढ़, झांसी, अलीगढ़ और वाराणसी में लगाए जा रहे हैं।
इनमें से चार रडार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जबकि एक रडार वाराणसी में आईएमडी द्वारा स्थापित किया जा रहा है। इससे रडार नेटवर्क में ओवरलैपिंग सुनिश्चित होगी और मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मनीष के अनुसार, ये उन्नत रडार बादलों की रिफ्लेक्टिविटी और त्रि-आयामी संरचना को ट्रैक करने में सक्षम हैं, जिससे 'नाउकास्टिंग' यानी अल्पकालिक मौसम पूर्वानुमान की क्षमता और बेहतर होगी। इसके साथ ही राज्य के ब्लॉक स्तर पर 2,450 स्वचालित मौसम केंद्र (ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन) और 2,000 स्वचालित वर्षामापी केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
इससे पूरे प्रदेश में एक सशक्त ब्लॉक-स्तरीय मौसम नेटवर्क तैयार होगा। उन्होंने यह भी बताया कि लखनऊ और वाराणसी में विंड प्रोफाइलर रडार मीटर स्थापित करने का प्रस्ताव है। इसके लिए स्थल चयन और टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और ये रडार अगले एक वर्ष में कार्यशील हो जाएंगे, जिससे दैनिक मौसम निगरानी और अधिक प्रभावी होगी।
इसके अलावा आईएमडी की 'मिशन मौसम योजना' के तहत बरेली, देवरिया और प्रयागराज में अत्याधुनिक प्रेक्षण प्रणालियां स्थापित की जाएंगी, जो अगले डेढ़ वर्ष में चालू होंगी। ये प्रणालियां सतही, रिमोट सेंसिंग और ऊपरी वायुमंडलीय प्रेक्षण में मदद करेंगी, जिससे पूर्वानुमान की सटीकता और आपदा प्रबंधन क्षमताएं मजबूत होंगी।
आईएमडी लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने बताया कि पारंपरिक प्रणालियों से डिजिटल प्रणालियों में बदलाव से रीयल टाइम डेटा, अधिक समयांतराल पर सूचनाएं और उच्च गुणवत्ता वाला मौसम डेटा उपलब्ध होगा। इससे समय रहते सटीक मौसम चेतावनी जारी करना संभव हो सकेगा। कुल मिलाकर, इन पहलों से उत्तर प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और जनसुरक्षा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
