कानपुर : अमेरिका, इजराइल, ईरान युद्ध का कारोबार पर असर, 10 फीसदी निर्यात ऑर्डर रुके

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Published By Virendra Pandey
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कानपुर, अमृत विचार : अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब शहर के निर्यात कारोबार पर भी पड़ने लगा है। युद्ध के चलते शहर के निर्यातकों के लगभग 10 फीसदी ऑर्डर रुक गए हैं। इनमें टेक्सटाइल और लेदर के उत्पाद सबसे अधिक है। निर्यात विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध लंबे समय तक खिंचता है तो ऑर्डर कैंसिल होने की संभावना खड़ी हो सकती है। फिलहाल अमेरिका व यूरोप के ऑर्डर सबसे अधिक रुक रहे हैं।

शहर के निर्यात ऑर्डर रुकने की सबसे बड़ी वजह समुद्री व हवाई मार्ग का बाधित हो जाना माना जा रहा है। इसके अलावा इस युद्ध के दौरान कार्गों कंपनियों की ओर से अधिक संभावित भाड़ा व इंश्योरेंस की रकम भी मानी जा रही है। अमेरिका की ओर से भारत पर टैरिफ लगाए जाने के बाद हाथ में आए ऑर्डर पर खरीदार की ओर से रुकने की यह स्थिति दूसरी बार वैश्विक बाजार में सामने आ रही है। ऐसे में टैरिफ से प्रभावित हुए निर्यात कारोबार में यह स्थिति पनपना निर्यात कारोबार के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा है। 

निर्यात विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी खरीदारों की ओर से जरूरत पर ही दूसरे देशों में ऑर्डर दिया जाता है। ऐसे में वे बाजार की बेहद विपरीत परिस्थितियों में ही ऑर्डर को होल्ड करने या फिर उत्पादन को रोकने जैसे निर्णय लेता है। निर्यात बाजार पर पैदा हुई नई स्थिति पर फेडेरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑग्रनाईजेशन (फियो) के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि फिलहाल वैश्विक स्तर पर जो निर्यात की स्थिति बन रही है वह काफी घातक हैं। शहर की बात की जाए तो खरीदारों की ओर से ऑर्डर के रोके जाने के निर्णय आने शुरू हो गए हैं। खाड़ी देशों से गुजरने वाले जल मार्ग के रास्ते यदि आम उत्पादों के लिए जल्द सुलभ न हुए तो ऑर्डर पर और अधिक विपरीत असर पड़ सकता है।  

नए ऑर्डर पर असर
मार्च महीने में खाड़ी देशों में खराब हुए हालात का असर अब निर्यातकों को नए ऑर्डर पर भी पड़ना शुरू हो गया है। ऐसे ऑर्डर जिनपर फिलहाल बातचीत चल रही है उन्हें भी विदेशी खरीदारों ने एक महीने के लिए टाल दिया है। इसकी वजह कार्गों के किराए और इंश्योरेंस के दामों पर पड़ रहे असर हैं। इन दोनो ही सुविधाओं के महंगे होने के चलते उत्पादों के दामों पर असर पड़ रहा है। यही वजह है कि नए ऑर्डर फिलहाल होल्ड की स्थिति पर आकर खड़े हो गए हैं।  

नए निर्यातकों पर मुसीबत
शहर में युद्ध की वजह से निर्यात कारोबार पर पड़ रहे असर से नए निर्यातक सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। टैरिफ के बाद से विदेशी खरीदारों की ओर से उपेक्षित नए निर्यातकों के सामने अब और बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। उनकी पूंजी के मुकाबले कारोबार ग्रोथ न करने की वजह से अब उनकी गुडविल पर भी असर पड़ने लगा हैं। शहर में 129 नए निर्यातकों ने पिछले वित्तीय वर्षों में निर्यात बाजार में कदम रखा था। उसके बाद से वे लगातार उभर रही वैश्विक स्थितियों से प्रभावित हो रहे हैं।

10 हजार करोड़ रुपये का शहर का निर्यात कारोबार

1 हजार करोड़ रुपये के निर्यात ऑर्डर फिलहाल रुके

60 फीसदी निर्यात कारोबार टैरिफ से हुआ था प्रभावित

5    हजार कर्मचारी सीधेतौर पर निर्यात युनिट से जुड़े

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